आरटीआई से प्राप्त सूचना के अनुसार डीजीपी कार्यालय द्वारा आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के संवैधानिक और विधिक अधिकारों का हनन किया गया है. अमिताभ ने एसपी गोण्डा कार्यकाल के शस्त्र जॉच प्रकरण में कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा उन्हें फर्जी तरीके से आपराधिक मुकदमे में फंसाने के मामले में आईपीएस सेवा नियमावली के तहत मीडिया तक अपनी बात रखने की अनुमति मांगी थी. नियम के अनुसार आवेदन के 12 सप्ताह बाद ऐसे मामलों में स्वतः ही अनुमति मान ली जाती है.
अमिताभ ने 12 सप्ताह बीतने के बाद प्रेस वार्ता करने का निश्चय किया पर उन्हें एक दिन पूर्व रोक दिया गया. आरटीआई सूचना के अनुसार गृह सचिव जेपी गुप्ता के मौखिक निर्देश पर एसी शर्मा, तत्कालीन डीजी ने 12 सप्ताह बीतने के बाद बिना किसी अधिकार के ही विधि विरुद्ध तरीके से अमिताभ की प्रेस वार्ता पर रोक लगा दिया जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अवैध उल्लंघन है. इसके बाद भी 18 सप्ताह बीत चुके हैं पर ना तो अमिताभ के आवेदन पर कोई निर्णय हुआ है और ना ही यह अवैध रोक हटाया गया है. वास्तव में यह जबरा मारे, रोये ना दे वाली स्थिति है.
जानी मानी समाजिक कार्यकत्री डा. नूतन ठाकुर के एफबी वॉल से साभार.





