अमर उजाला, इलाहाबाद से खबर है कि यहां के दो पत्रकारों समेत तीन मीडियाकर्मियों को संस्थान की आपत्ति के चलते फेलोशिप से हाथ धोना पड़ा. मामला लगभग एक-डेढ़ साल पुराना है. वर्ष 2010-11 के लिए सांस्कृतिक मंत्रालय ने जूनियर फेलोशिप तथा सीनियर फेलोशिप में चार सौ लोगों का चयन किया. इस फेलोशिप में संस्कृति से जुड़े कई विशयों पर शोध प्रस्तुत करना था. इस फेलोशिप में अमर उजाला, इलाहाबाद से जुड़े तीन पत्रकारों का भी चयन हुआ था.
अमर उजाला में डीएनई एवं सिटी चीफ की जिम्मेदारी निभा रहे कुलदीप कुमार श्रीवास्तव का चयन जूनियर फेलोशिप के तहत फोर्क सांग पर शोध करने के लिए हुआ, जबकि सीनियर फोटो जर्नलिस्ट संजय बनौधा तथा कल्चरल बीट की रिपोर्टिंग देखने वाले अनिल सिद्धार्थ का चयन सीनियर फेलोशिप कटेगरी में क्रमश: फोर्क थियेटर एवं फोर्क अदर में शोध के लिए हुआ. बताया जा रहा है कि इन लोगों ने इस संदर्भ में अपने संस्थान से फेलोशिप करने के लिए अनुमति मांगी थी, परन्तु संस्थान ने इन्हें फेलोशिप करने की अनुमति नहीं दी.
इस संदर्भ में जब डीएनई कुलदीप श्रीवास्तव से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनका चयन फेलोशिप के लिए हुआ जरूर था, परन्तु संस्थान की आपत्ति के चलते इसे छोड़ दिया. फिलहाल कोई फेलोशिप नहीं कर रहा हूं. फोटो जर्नलिस्ट संजय बनौधा से इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने भी यही कहा कि संस्थान की आपत्ति के बाद इन्होंने फेलोशिप नहीं किया. जबकि तीसरे सदस्य अनिल सिद्धार्थ से इस संदर्भ में बात करने के लिए कॉल किया गया तो उन्होंने फोन पिक ही नहीं किया.
नीचे सांस्कृति मंत्रालय की लिस्ट में जारी इन तीनों पत्रकारों का नाम एवं फेलोशिप का सब्जेक्ट –







