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सड़क पर बीबी-बच्‍ची के शव के पास वो मदद को चिल्‍लाता रहा, लोग आते जाते रहे

जयपुर। यहां संवेदनहीनता का वो नजारा देखने को मिला जो बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला था। जब सोमवार दोपहर सड़क हादसे के बाद एक व्यक्ति अपनी पत्नी और आठ माह की बच्ची की लाश के साथ सड़क पर मदद के लिए चिल्ला रहा था लेकिन किसी ने उसकी एक नहीं सुनी। इस वाक्ये ने एक बार फिर से ये साबित कर दिया कि लोगों के भीतर से इंसानियत खत्म हो गई है। जब वो असहाय पति अपनी पत्नी और बच्ची को बचाने के लिए करीब पौन घंटे तक दौड़-दौड़कर लोगों से मदद की गुहार लगाता रहा। लेकिन लोग रुकते, देखते और आगे बढ़ते रहे। किसी ने भी उन्हें अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई।

जयपुर। यहां संवेदनहीनता का वो नजारा देखने को मिला जो बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला था। जब सोमवार दोपहर सड़क हादसे के बाद एक व्यक्ति अपनी पत्नी और आठ माह की बच्ची की लाश के साथ सड़क पर मदद के लिए चिल्ला रहा था लेकिन किसी ने उसकी एक नहीं सुनी। इस वाक्ये ने एक बार फिर से ये साबित कर दिया कि लोगों के भीतर से इंसानियत खत्म हो गई है। जब वो असहाय पति अपनी पत्नी और बच्ची को बचाने के लिए करीब पौन घंटे तक दौड़-दौड़कर लोगों से मदद की गुहार लगाता रहा। लेकिन लोग रुकते, देखते और आगे बढ़ते रहे। किसी ने भी उन्हें अस्पताल पहुंचाने की जहमत नहीं उठाई।

सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि कन्हैया लाल अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ बाइक पर ससुराल जा रहा था। तभी जयपुर के घाट की गुणी सुंरग से गुजरते वक्त एक ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी थी। बच्ची और उसकी पत्नी को काफी चोटें आई थी। लेकिन कन्हैया कम घायल हुआ था। सुरंग में नेटवर्क न होने की वजह से मदद के लिए वह किसी को फोन भी नहीं कर सका। समय पर इलाज न मिल पाने के कारण पत्नी और बच्ची की मौत हो गई। घटना के बाद ट्रक चालक ट्रक लेकर फरार हो गया। उस पर हरियाणा का नंबर था। कन्हैया इतना बेबस हो गया कि न तो वो इस हालत में था कि अपनी बच्ची और पत्नी का शव उठा कर ले जा सके और ना ही अपने बेटे और खुद का इलाज कराने के लिए अस्पताल जा सका।

वह कभी पत्नी गुड्डी और बेटी आरुषि के शव से लिपटकर रो रहा था तो कभी घायल बेटे तनीष को साहस बांध रहा था। आखिरकार वो बेहोश हो गया। 40 मिनट बाद टोल बूथ पर तैनात कर्मी ने सीसीटीवी कैमरे में यह दृश्य देखा तो सभी को उठाकर अस्पताल पहुंचाया। जहां महिला और उसकी बच्ची को मृत घोषित कर दिया और कन्हैया लाल अपने बेटे के साथ इलाज कराकर वापस लौट गया। गौरतलब है कि घाट की गुणी सुरंग में आम लोगों का दुपहिया वाहन लेकर आना जाना मना है, लेकिन इसके बाद भी कन्हैया ने ये जोखिम उठाया। (जागरण)

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