बदायूं। दबंग के सामने कोई नियम-कानून नहीं चलता। जी हां! यह बात विधान सभा चुनाव में स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को देखते हुए एक दम सच साबित हो रही है। आचार संहिता लगने के बाद से स्थानीय पुलिस व प्रशासन के अधिकारी आम आदमी से सीधे मुंह बात नहीं कर रहे हैं। आयोग का भय दिखा कर सीधे डंडे से बात की जा रही है। शुरू में तो लग रहा था कि आचार संहिता नहीं, बल्कि इमरजेंसी लगा दी गयी है, पर आयोग की कड़ाई के बाद पुलिस का रवैया कुछ हद तक बदला है।
आयोग के नियमों का सहारा लेकर ही स्थानीय अधिकारियों ने बरेली से प्रकाशित एक अखबार के पंचाग में छपे प्रत्याशियों के विज्ञापनों को लेकर मुकदमा दर्ज कराने में देर नहीं की, पर वही प्रशासन बसपा प्रत्याशियों पर पूरी तरह मेहरबान नजर आ रहा है। सत्ता की दबंगई के सामने प्रशासन बौना साबित हो रहा है या फिर सत्ताधारी प्रत्याशियों को छूट दे रहा है, क्योंकि बसपा प्रत्याशियों की वॉल पेंटिंग नहीं हटाई जा रही हैं, जबकि वॉल पेंटिंग के कई बार अखबारों में फोटो भी प्रकाशित कर दिये गये हैं, इससे भी बड़े आश्चर्य की बात यह है कि बिल्सी विधान सभा क्षेत्र के बसपा प्रत्याशी मुसर्रत अली प्रत्येक गांव में डेढ़ सौ-दो सौ कैलेंडर बांट रहे हैं।

कैलेंडर की कीमत बीस रुपये के लगभग बताई जा रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अब तक पांच लाख रुपये के कैलेंडर बांट दिये गये होंगे, जबकि बरेली की एक प्रेस में छपवाये गये कैलेंडर्स पर दो हजार संख्या दर्शाई गयी है। इस संबंध में एडीएम प्रशासन दिव्य प्रकाश गिरि से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आचार संहिता उल्लंघन के प्रकरण एडीएम वित्त देख रहे हैं और जब एडीएम वित्त राधाकृष्ण से बात की तो उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें जानकारी नहीं है, पर वह जांच कर कार्रवाई करायेंगे।
स्वतंत्र पत्रकार बीपी गौतम की रिपोर्ट.






