नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लेने पर समाजवादी पार्टी से निकाले गए शाहिद सिद्दीकी ने मुलायम सिंह पर पलटवार किया है। एक अखबार से बातचीत में सिद्दीकी ने कहा कि मुलायम हकीकत से अनजान हैं। शाहिद के मुताबिक, एसपी सुप्रीमो मुस्लिम मन को नहीं समझते और उन्हें वोट हासिल करने के पुराने हथकंडे छोड़कर अपने वादों को पूरा करना चाहिए।
शाहिद का कहना है कि ये सब पार्टी के उन नेताओं की राजनीति का नतीजा है जिन्होंने कुछ साल पहले यूपी के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ मंच साझा किया था। उन्होंने सपा पर उन्हें वोट हासिल करने के लिए बलि का बकरा बनाने का आरोप लगाया है। सिद्दीकी ने कहा, मैंने एक पत्रकार के तौर पर मोदी का इंटरव्यू किया। मेरा मकसद मोदी को किसी तरह का भी फायदा पहुंचाना नहीं था। मैंने तो 2002 के दंगों के बाद की स्थिति बताने की कोशिश की है, जिसे लोग भूल चुके थे। समाजवादी पार्टी ने मुझे बाहर करने का फैसला सिर्फ वोट बैंक की राजनीति की वजह से किया है।'
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, सच कहूं तो मोदी की आड़ में मुझे बलि का बकरा बनाया गया है। सिद्दीकी ने कहा, एसपी के दिल में चोर है। वह पहले कल्याण सिंह को शामिल करते हैं, साक्षी महाराज को शामिल करते हैं और फिर इसके लिए माफी मागते हैं। मैं हमेशा धर्म निरपेक्षता के लिए लड़ा हूं और लड़ूंगा। समाजवादी पार्टी का यह फैसला बेहद अफसोसनाक है और पत्रकारिता पर हमला है। इस पार्टी में सिर्फ परिवारवाद की चल रही है।
हाल ही में अपने उर्दू साप्ताहिक 'नई दुनिया' के लिए सिद्दीकी ने मोदी का इंटरव्यू किया था, जिसमें मोदी ने 2002 के दंगों के लिए माफी मांगने से इनकार करते हुए कहा था कि अगर वह दोषी पाए जाएं तो उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाए। यह पूछे जाने पर कि उन्होंने इस वक्त मोदी का इंटरव्यू क्यों किया, तो सिद्दीकी ने कहा, बहुत सारे लोग इस तरह के सवाल कर रहे हैं जो पूरी तरह से बेमानी हैं। एक पत्रकार के रूप में मोदी का इंटरव्यू करने का मौका मिला और मैंने किया। मैंने तो मोदी से वह सवाल पूछे जो शायद कोई नहीं पूछ सकता था।'
उन्होंने कहा, मोदी का इंटरव्यू करने का मेरा कोई दूसरा मकसद नहीं था।' अगले सियासी कदम के बारे में पूछे जाने पर सिद्दीकी ने कहा, मैं अब दलगत राजनीति से दूर रहूंगा। लेकिन लिखने, पढ़ने और बोलने का मेरा सिलसिला चलता रहेगा। सभी पार्टियों में बोलने और लिखने की आजादी पर बंदिश है, ऐसे में मैं दलगत राजनीति नहीं कर सकता। इसलिए किसी पार्टी से जुड़ने का सवाल ही नहीं है।' साभार : जागरण