बस्ती में सपा जिलाध्यक्ष पर आरोप है कि वे अपनी ही पार्टी को 18 लाख का चूना लगा दिया। मामले के अनुसार जिले में एक अदद पार्टी कार्यालय के लिये तरस रहे कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री ने 18 लाख रुपये की सहायता मुहैया कराई। सपा जिलाध्यक्ष ने शहर के किनारे स्थित नाले की जमीन का दो लाख रुपये में बैनामा करा लिया, चूंकि जमीन विवादित थी, इस वजह से जिलाध्यक्ष तहसील में खारिज दाखिल नहीं कर पाये और 29 नवम्बर 2012 को भूमि पूजन के बाद काम रूक गया।
उसके बाद कार्यकर्ता कुछ दिन चुप रहे मगर अब जिलाध्यक्ष के इस गबन के खिलाफ आवाज उठनी शुरू हो गई। सपा के वरिष्ठ नेता दिनेश यादव और सुरेन्द्र यादव ने जिलाध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मुख्यमंत्री से इस बात की लिखित शिकायत की और जिले के सभी अखबार के दफ्तरों को प्रेस नोट भी जारी किया। इलेक्ट्रनिक मीडिया में इण्डिया न्यूज, ईटीवी, जी न्यूज, सी न्यूज, आईबीएन7, एसएमस न्यूज एजेन्सी और न्यूज टाईम ने तो इस इस खबर को जमकर उछाला, मगर दूसरे दिन सभी अखबारों के पेज से यह खबर गायब दिखी। सत्ता पक्ष का मामला होने की वजह से दैनिक जागरण, अमर उजाला, हिन्दुस्तान और राष्ट्रीय सहारा में किसी भी ब्यूरोचीफ ने इस खबर को छापने की हिम्मत नहीं दिखाई। सभी अखबार जिलाध्यक्ष के सामने सरेंडर बोल गये।
निष्पक्ष काम करने का प्रण लेकर चलने वाले बड़े अखबार जब सपा जिलाध्यक्ष के सामने स्टैंड नहीं कर पाये तो क्या उम्मीद की जाये कि ये अखबार वाले सपा के किसी मंत्री की खबर लिख पायेंगे। सपा नेता और शिकायत करने वाले दिनेश यादव सुबह सारे अखबारों को चेक करने के बाद बेहद हतोत्साहित हुये। पहले किसी तरह वे हिम्मत जुटा कर अपने जिलाध्यक्ष के खिलाफ खड़े हुये और प्रिंट मीडिया ने इस खबर से मुंह फेर लिया। इलेक्ट्रानिक मीडिया में खबर चलने के बाद जिलाध्यक्ष को मानसिक प्रताड़ना तो हुई मगर सपा आलाकमान के पास पहले चापलूसी करने पहुंचे जिलाध्यक्ष सब कुछ मैनेज कर ले गये। खैर, प्रदेश में बस्ती के जिलाध्यक्ष की छीछालेदर से वे इलेक्ट्रानिक मीडिया से काफी बौखलाये भी हुये हैं और प्रिंट मीडिया उन्हें पूरा संरक्षण देने में जुटा हुआ है। ऐसी पत्रकारिता से समाज में हम सभी का सर नीचा करने पर मजबूर कर दिया है।
अभी यह मामला चल ही रहा था कि शनिवार को जिलाध्यक्ष का एक और गोलमाल सामने आ गया। मगर प्रिंट मीडिया ने इसे भी छापने से इनकार कर दिया। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष ने अपनी ही पार्टी को पूरी तरह से कंगाल कर दिया है। जिले में समय समय पर आयोजित कार्यक्रमों को सुचारू रूप से चलाने के लिये मुख्यमंत्री ने जिलाध्यक्ष को 12 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई। 23 मार्च को यह राशि अरबन को आपरेटिव बैंक में जिला समाजवादी पार्टी कार्यालय के नाम से खुले खाते में सीधे भेज दिया गया। उसके बाद ठीक 12 दिन बाद जिलाध्यक्ष राजकपूर यादव ने 2 अप्रैल को सारी राशि निकाल ली। अब आलम यह है कि जिले की समाजवादी पार्टी पुरी तरह से कंगाल हो चुकी है। पार्टी की लुटिया डुबाने पर तुले जिलाध्यक्ष राजकपूर यादव के इस कारनामे की शिकायत सपा के ही कार्य समिति के सदस्य सुरेन्द्र यादव ने मुख्यमंत्री से बुधवार को बाकायदा मिलकर की है। जिन पैसों का जिलाध्यक्ष ने गबन किया है वह पार्टी के सदस्यों का ही पैसा है।
सपा का सक्रिय सदस्य बनने के लिये 500 रुपये लेकर जिले में हजारों लोगों को सदस्य बनाया गया और अब जिलाध्यक्ष ने उसका भी गबन कर लिया। इससे पहले जिलाध्यक्ष ने पार्टी कार्यालय बनवाने के लिये मुख्यमंत्री द्वारा दिये गये 18 लाख रुपये का भी हेरफेर कर दिया था। नाले की जमीन का 2 लाख में बैनामा करवाया और उसके बाद वह जमीन विवादों में फंस गई। पार्टी कार्यालय का सपना जिले के तमाम समाजवादी पार्टी के लिये अधूरा रह गया, मगर जिलाध्यक्ष महोदय करोड़ों रुपये लगाकर अपना मकान बनाने में लगे हैं। जिलाध्यक्ष की दबंगई का आलम यह है कि उनकी शिकायत करने वाले पार्टी के सदस्य को जानमाल की धमकी मिल रही है कि अगर मुख्यमंत्री के पास गये तो खैर नहीं।
बस्ती से सतीश श्रीवास्तव की रिपोर्ट.






