आगरा की रहने वाली गायत्री पाराशर पत्रकारिता की छात्रा हैं. उन्होंने एक पत्र आगरा मंडल के आईजी व पुलिस अफसरों को भेजा है. इसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह एक महिला (यादव) वकील और पुलिस वाले (यादव) सांठगांठ करके उनके परिवार को परेशान कर रहे हैं. पूरा पत्र इस प्रकार है– सेवा में, आईजी, आगरा मंडल, आगरा : विषय- पत्रकारिता की एक छात्रा व उसके परिजनों को पुलिस उत्पीड़न से बचाने और जान-माल की रक्षा कराने हेतु गुहार : महोदय, मैं गायत्री पाराशर (निवासी भावना सुपर बाजार, फ्लैट न. 204, सेक्टर 9, आवास विकास, सिकन्दरा, आगरा) मीडिया स्टूडेंट हूं. इन दिनों मैं और मेरा परिवार पुलिस उत्पीड़न का शिकार है. हम लोगों को मारहरा गैस ऐजेंसी की प्रोपराइटर और पेशे से अधिवक्ता मीनेश कुमारी यादव अपने पैसे व प्रभाव के बल पर पुलिस के जरिए उत्पीड़ित कराती हैं.
हाल ही में अराउ चौकी थाना सिरसागंज जिला फिरोजाबाद से मीनेश कुमारी ने किसी मनोज कुमार द्वारा झूठी चोरी की एफआईआर दर्ज करा दी जिसमें मेरे बहनोई योगेन्द्र कुमार, उनके भाई चमन प्रकाश व मेरे भाई जनार्दन पाराशर को अभियुक्त बनाया गया है. उसी को लेकर पुलिस काफी परेशान कर रही है. मीनेश कुमारी यादव ने मुझे धमकी दी है कि तुझे और तेरे परिवार को उठवा लूगीं, बहनोई का मर्डर करा दूगीं, मेरे पास बहुत से गुण्डे हैं, अब तो सरकार हमारी है, अब मैं जितने चाहूं उतने मुकद्दमें लगवा दूंगी.
सर मैं एक छात्रा हूं और ये मुझे मानसिक तौर पर उत्पीड़ित कर मेरा भविष्य बिगाड़ रही हैं. ये पहले भी झूठे मुकद्दमें लगाकर नाबालिग बच्चों के भविष्य खराब कर चुकी हैं. मीनेश कुमारी यादव मेरे व मेरे परिवार के साथ कोई भी अप्रिय घटना घटित करा सकती हैं. मेरा अनुरोध है कि मीनेश कुमारी यादव के क्रियाकलापों की सख्ती से जांच की जाए और इनसे हम लोगों के जानमाल की रक्षा की जाए.
यहां पर मीनेश कुमारी की कार्यशैली और अतीत के बारे में बताना चाहूंगी. ये लोगों के साथ पहले मेलजोल बढ़ाती हैं और अपने गैस एजेंसी व अन्य व्यापार में पैसा लगवाती हैं. जब पैसा लौटाने की बारी आती है तो उन पर मुकद्दमा लगा देती हैं. यह इतनी दंबग महिला है कि पुलिस व आला अधिकारियों को भी मैनेज कर लेती हैं. किसी ने अगर इस महिला वकील के खिलाफ कोई शिकायत की तो उसकी सुनवाई नहीं होती. मेरे बहनोई योगेन्द्र कुमार दीक्षित (गांव पोस्ट पिदौरा जिला एटा) से भी वर्ष 2007 में मीनेश कुमारी ने जरूरत बताकर बहाने से पैसे लिए और गैस एजेंसी में साझेदार बना लिया. अपने लैटर हैड पर साझेदारी डीड बनाकर दे दी. जीजाजी ने सभी स्रोतों से चेक द्वारा पैसे लगाना शुरू कर दिये और गैस एजेंसी में मेहनत करने लगे. उन्होंने साझेदारी में एक आयशर केन्टर खरीदी जिसमें एक लाख दस हजार मार्जिन मनी और व बीस हजार रुपये बॉडी बनाने के लिए दिये जिसमें मीनेश कुमारी ने मेरे बहनोई को गाड़ी में गारन्टर बना दिया. इसकी किस्त सुचारू रूप से मेरे बहनोई द्वारा चुकाई गयी.
इसके बाद एक फ्लैट साझेदारी में खरीदा जिसमें मेरे बहनोई ने चैक द्वारा पेमेंट किया. जब मेरे बहनोई का उनके पार्टनरशिप में अधिक धन लग गया तो उन्होंने अपने धन की वापसी की मांग की तो मीनेश कुमारी ने उनको अपने विश्वास में लेने के लिए मेरे बहनोई के नाम वसीयत कर दी जिसमें अपने पूरे परिवार व अपने मरने के बाद का सारा उल्लेख कर दिया. लेकिन यह मीनेश कुमारी की चाल थी. जब मेरे बहनोई हर दिन की तरह एजेंसी पर पहुंचे तो वहा पर कुछ गुण्डे मीनेश कुमारी के साथ बैठे पाये. मीनेश कुमारी ने मेरे बहनोई से कहा कि "मैंने आज तक अपने भाई बहनों व रिश्तेदारों तक को कोई हिस्सा नही दिया और अपने भतीजे से चौबीस वर्ष से जायदाद का केस लड़ रही हूं, तू मुझसे क्या लेगा, वो बसीयत तो मैंने खारिज भी करा दी". मीनेश कुमारी द्वारा बुलाए गये कुछ गुण्डों ने मेरे बहनोई को धमकी दी कि "अब तेरा भी खेल समाप्त हो गया अब तू अपने घर जा वर्ना तू अपनी जान से हाथ धो बैठेगा"
तब मेरे बहनोई ने न्यायालय की शरण ली और अपने साक्ष्यों के आधार पर गाड़ी व मकान का मुकद्दमा पंजीकृत कराया। तथा मेरे बहनोई ने अपने वकील द्वारा नोटिस भेज कर मीनेश कुमारी को अवगत कराया। जिससे जलकर मीनेश कुमारी ने एक मनगणंत कहानी बनाकर धारा 156(3) द्वारा मुकद्दमा पंजीकृत कराया जिसमें मेरे बहनोई योगेन्द्र कुमार, उनके भाई चमन प्रकाश, मेरी बहन ममता और मेरा भी नाम लिखवा दिया. पैसे के बल पर पुलिस से परेशान भी कराया। माननीय हाईकोर्ट द्वारा अरेस्ट स्टे का आर्डर मिल गया। हाईकोर्ट आर्डर पर भी विवेचक अनवर अली ने मीनेश कुमारी के कहने पर मेरे बहनोई के घर आकर उत्पीड़न किया जिसकी शिकायत माननीय मुख्यमंत्री, एसएसपी, डीआईजी महोदयों को रजिस्ट्री व फैक्स द्वारा सूचित किया। तब विवेचक ने चिढ़कर चार्जशीट प्रस्तुत कर दी जिस पर माननीय हाईकोर्ट ने सेम डे जमानत का आर्डर कर दिया और मुझ प्रार्थी गायत्री पाराशर को मुकद्दमें से अलग कर दिया।
मीनेश कुमारी और अनवर अली ने बहनोई के साथ मारपीट की और दो लाख रुपये की लूट भी की. धमकी दी कि हम तेरा व्यापार नहीं चलने देंगे या तो तू अपने मुकद्दमें वापस ले वर्ना तुझे हम किसी दिन मौत के घाट उतार देंगे. इसकी शिकायत थाना मारहरा पर की तो उन्होंने रिपोर्ट नहीं लिखी. कोर्ट के आदेश पर ही मीनेश कुमारी व एसआई अनवर अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा सका।
हाल ही में अराउ चौकी थाना सिरसागंज जिला फिरोजाबाद से मीनेश कुमारी ने किसी मनोज कुमार द्वारा झूठी चोरी की एफआईआर दर्ज करा दी जिसमें मेरे बहनोई योगेन्द्र कुमार, उनके भाई चमन प्रकाश, मेरे भाई जनार्दन पाराशर को अभियुक्त बनाया गया है. इसी को लेकर पुलिस काफी परेशान कर रही है. मेरे व मेरे परिवार के साथ अप्रिय घटना घटित हो सकती है. पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों को दंडित कराने की कृपा करें.
प्रार्थी
गायत्री पाराशर
आगरा
प्रतिलिपि-
डीआईजी, आगरा मंडल
एसएसपी, आगरा
एसएसपी, फिरोजाबाद
मुख्यमंत्री, लखनऊ





