इंदौर। समाचारों के सनसनीखेज प्रस्तुतिकरण के चलन पर चिंता जताते हुए पूर्व उप प्रधानमंत्री और भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि पत्रकारिता जगत की इस ‘विकृति’ के लिये इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया के मुकाबले ज्यादा जिम्मेदार है। इंदौर प्रेस क्लब के स्वर्ण जयंती महोत्सव के दौरान ‘आज की पत्रकारिता’ के विषय पर आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद में हिस्सा लेते वक्त आडवाणी ने यह मत व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘यह माना जा रहा है कि अगर समाचार में सनसनी नहीं है तो लोग इसे पढेंगे या देखेंगे नहीं। इसलिये समाचारों को इस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे सनसनी पैदा हो।’
आडवाणी ने कहा, ‘मैं मानता हूं कि यह काम टेलीविजन के जरिये ज्यादा होता है। समाचारों को सनसनीखेज तरीके से परोसने की विकृति के लिये प्रिंट मीडिया से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जिम्मेदार है।’ शीर्ष भाजपा नेता ने पेड न्यूज पर भी चिंता जतायी। उन्होंने कहा, ‘किसी समाचार में पेड न्यूज का लक्षण स्पष्ट दिखायी देता है। किसी अखबार में छपता है कि फलां उम्मीदवार की चुनावी सभा में लाखों लोग थे तो किसी उम्मीदवार के बारे में लिखा जाता है कि उसकी सभा में केवल दो..चार लोग थे।’
उन्होंने मीडिया जगत में पेड न्यूज के चलन पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘पहले हम सोचते थे कि हमारे यहां (राजनीतिक बिरादरी) ही भ्रष्टाचार होता है।’ आडवाणी ने हालांकि कहा, ‘पिछले कुछ बरसों में मीडिया में पेड न्यूज की विकृति सामने आयी है। लेकिन मेरा मानना है कि पत्रकार समाज के भले के लिये अब भी बहुत कुछ कर सकते हैं।’
इसके अलावा, उन्होंने इच्छा जतायी कि हिन्दी पट्टी के प्रमुख राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश में फिल्म सिटी स्थापित होनी चाहिये। आडवाणी ने कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहा कि वह इस दिशा में प्रयास करें। चौहान ने परिसंवाद में कहा, ‘मीडिया जगत और सियासत में गिरावट जरूर आयी है। लेकिन दोनों क्षेत्रों में फिलहाल सबकुछ खत्म नहीं हुआ है।’ उन्होंने पूंजीपतियों के मीडिया क्षेत्र में धड़ल्ले से उतरने के मकसद पर सवाल उठाये और किसी का नाम लिये बगैर कहा कि कारोबारी हितों की हिफाजत के लिये समाचार चैनल शुरू किये जा रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘महज 100..200 प्रतियों की प्रसार संख्या वाली पत्रिकाओं के दम पर धन ऐंठने (ब्लैकमेलिंग) की कोशिश भी की जाती है।’





