फर्रुखाबाद। कोतवाली कायमगंज के कार्यवाहक इंस्पेक्टर की साजिश से प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रानिक जर्नलिस्ट एसोसिएशन तहसील कायमगंज अध्यक्ष संजय शर्मा व विनय सक्सेना को जान का खतरा हो गया है। एसोसिएशन के महामंत्री अलोक सिंह इन्तखाब अख्तर बज्जू खां, आदिल अमान आदि पत्रकारों ने पुलिस अधीक्षक से भेंट की और उन्हें कार्यवाही के लिए ज्ञापन दिया। एसपी जोगेंद्र कुमार ने सीओ कायमगंज से फ़ोन बात कर पत्रकारों को न्याय दिलाने का वायदा किया।
ज्ञापन में पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया गया कि संगठन के तहसील इकाई अध्यक्ष संजय शर्मा पर दिनांक 24 मई को सुमित कुमार मिश्रा व अमित कुमार मिश्रा पुत्रगण रमेश चन्द्र मिश्रा, नरेश शर्मा, सुदीश शर्मा, सचिन बाथम, विक्की सक्सेना तथा सोनी दुबे पुत्र विमल दुबे, बीटू गंगवार, अमित गंगवार तथा बीटू की माँ निवासीगण मोहल्ला पृथ्वीदरवाजा ने मोहल्ला में खडे़ पीपल के वृक्ष के पास बुलवाकर प्राणघातक हमला किया। हमलावरों की सरगना एक महिला है, जो सैक्स रैकेट चलाती है। इस महिला के कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक एसके चन्देल से मधुर सम्बन्ध हैं।
अमित गंगवार पर दैनिक अमर उजाला के एजेंट राजेश राजपूत के लगभग सात हजार रुपये उधार हैं। जब उसने उधार के रुपये मांगे तो इस महिला के पुत्र ने अभद्रता की। जिसकी लिखित शिकायत दिनांक 20 मई को प्रभारी निरीक्षक से की थी। शिकायत के समय संगठन अध्यक्ष संजय शर्मा कोतवाली में पीडि़त के साथ गये थे, जिससे नाराज होकर प्रभारी निरीक्षक ने रैकेट संचालक महिला से कहकर षड़यन्त्र करके समझौते के बहाने उसके लड़कों व अन्य के माध्यम से संजय शर्मा व पत्रकार विनय सक्सेना को मोहल्ला पृथ्वी दरवाजा बुलवा लिया। जहां संजय के ऊपर जान से मारने की नियत से तमंचे से फायर किया गया। फायर मिस होने पर तमंचों की बटों से संजय एवं विनय सक्सेना पर प्रहार किये गए। जिससे दोनों के सिर व आंख में गम्भीर चोटें आयीं हैं।
इसी बीच हमलावरों ने राजेश के पन्द्रह हजार रुपये लूट लिए। घटना के तुरन्त बाद कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक एसके चन्देल ने महिला को कोतवाली बुलवाकर एक तहरीर तैयार करवायी और पत्रकारों पर झूठे आरोप लगवाये। जब पीडि़त पत्रकार कोतवाली तहरीर देने गये तो कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक ने समझौता करने का दबाव डाला एवं लगभग एक घंटे तक पत्रकारों का मानसिक उत्पीड़न कर परेशान किया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि उक्त सभी घटना को अंजाम देने वाले सभी शातिर किस्म के अपराधी हैं। जिनकी पैरवी कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक कर रहे हैं और पत्रकार पक्ष के गवाहों को धमकाकर उनसे दोषियों के पक्ष में हलफनामा लगवा रहे हैं। 20 मई को दी गई तहरीर पर कार्यवाही न करना कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक की सांठ-गांठ का प्रमाण है। उनकी संदिग्ध गतिविधियों के कारण पीडि़त पत्रकारों को जान का खतरा है। यदि भविष्य में कोई भी घटना घटित होती है। तो इसके लिए कार्यवाहक प्रभारी निरीक्षक जिम्मेदार होंगे।






