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समीर दीवान ने दैनिक भास्कर छोड़ा, द पायोनीयर में न्यूज एडिटर बने

भास्कर से वरिष्ठ पत्रकारों के इस्तीफे की खबर पढ़ रहा हूं। मैं भी पिछले पांच साल से भास्कर में बतौर डीएनई काम करता रहा। जिन कमलेश सिंह और राजीव सिंह के बड़े पत्रकार होने की खबर मैं इस साइट पर पढ़ता आ रहा हूं, उनमें से एक राजीव सिंह को बहुत पास से मैंने देखा है। जिस तरह के संपादकों की तानाशाही की बात खास कर अमर उजाला के लखनऊ संस्करण के इंदुशेखर पंचोली की तानाशाही के बारे में इस साइट पर खबर है, वह लगता है जैसे तमाम मीडिया हाउसों में बड़े पदों पर बने रहने के लिए एक तरह से अनिवार्य शर्त हो गई है। इनमें से बहुतेरे पत्रकार बड़े पदों पर आते ही शायद इसी एक योग्यता के बल पर हैं कि वे मालिक की गैरहाजिरी में बड़े हाउसेस में मालिक बन कर रहें।

भास्कर से वरिष्ठ पत्रकारों के इस्तीफे की खबर पढ़ रहा हूं। मैं भी पिछले पांच साल से भास्कर में बतौर डीएनई काम करता रहा। जिन कमलेश सिंह और राजीव सिंह के बड़े पत्रकार होने की खबर मैं इस साइट पर पढ़ता आ रहा हूं, उनमें से एक राजीव सिंह को बहुत पास से मैंने देखा है। जिस तरह के संपादकों की तानाशाही की बात खास कर अमर उजाला के लखनऊ संस्करण के इंदुशेखर पंचोली की तानाशाही के बारे में इस साइट पर खबर है, वह लगता है जैसे तमाम मीडिया हाउसों में बड़े पदों पर बने रहने के लिए एक तरह से अनिवार्य शर्त हो गई है। इनमें से बहुतेरे पत्रकार बड़े पदों पर आते ही शायद इसी एक योग्यता के बल पर हैं कि वे मालिक की गैरहाजिरी में बड़े हाउसेस में मालिक बन कर रहें।

मैं पिछले दो दशकों से हिन्दी, अंग्रेजी के अखबारों में काम करता रहा हूं और रायपुर छत्तीसगढ़ के अलावा मैं प्रदेश के ही विभिन्न शहरों में कभी ब्यूरो प्रमुख तो कभी संपादक के पद पर रहा। पर हद तो तब हो गई जब राजीव सिंह ने स्टेट हेड रहते हुए एक दिन मुझे भरे एडिटोरियल में न्यूज मैगजीन पढऩे से रोका। प्रतिकार करने पर ट्रांसफर की धमकी दी और कर भी दिया। मैंने इसी एक बात से खिन्न होकर भास्कर से इस्तीफा दे दिया और बतौर न्यूज एडिटर अंग्रेजी अखबार -द पायोनीयर जाइन कर लिया।

इसके पीछे कारण यह था कि वे अपने साथ लाए एक सज्जन को न्यूज एडिटर बनाना चाहते थे। जो उस उम्र में भास्कर लाए गए थे जिसमें भास्कर में एंट्री ही नहीं मिलती। तमाम तरह के एसाइनमेंट्स में फेल होने के बाद भी उन्हें सीनियर न्यूज एडिटर बनाने की उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई तो ऐन अपनी रवानगी के डेढ़ महीने पहले मेरा छोटी सी जगह पर तबादला कर दिया। अपने आदमी को उस जगह पर टिका दिया, जो कायदे से मेरी जगह थी। भास्कर रायपुर में इसे सब जानते हैं।

बहरहाल मैंने भास्कर रायपुर से डीएनई के पद से 14 तारीख को इस्तीफा दे दिया है। बकायदा जितने साल मैं भास्कर में रहा, हर साल ही मुझे किसी न किसी बड़े एसाइनमेंट के लिए नेशनल एडिटर से प्रशंसा पत्र मिलते रहे हैं। वे मेरे सगे नहीं हैं। मै चाहता हूं कि मेरे इस्तीफे की खबर भी इसमें छपे। पांच साल पहले मेरे नवभारत छोड़कर भास्कर भिलाई-दुर्ग के एडिटर होने की खबर आपने भड़ास में छापी थी। वह खबर तो मुझे नहीं देनी पड़ी थी वह तो ऐसे ही छप गई थी। धन्यवाद सहित।

समीर दीवान

एनई

द पायोनीयर

रायपुर एडिशन (छत्तीसगढ़)

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