जनता का पैसा है, खूब उड़ाओ. यही फंडा रहता है सरकारों का. प्रदेश सरकारें हों या केंद्र सरकार, अखबारों व चैनलों पर विज्ञापन के मद में अरबों रुपये रुपये उड़ा दिए जाते हैं और ये पैसे धंधेबाज मालिकों के पाकेट में जाते हैं. वे मालिक जिनका सरोकार पत्रकारिता नहीं बल्कि कंपनी का टर्नओवर हर साल बढ़ाते रहना होता है. इन दिनों केंद्र सरकार अपने सरकारी चैनलों पर खूब मेहरबान है. इन चैनलों के बड़े बड़े विज्ञापन अखबारों में प्रकाशित कराए जाते हैं.


डीडी न्यूज और संजीव श्रीवास्तव को इस कदर प्रमोट किया जा रहा है कि रेल बजट व आम बजट के समय तो रोजाना इनका विज्ञापन अखबारों में प्रकाशित किया जाता था. बताया जाता है कि आम चुनाव करीब देखकर केंद्र सरकार अपनी ब्रांडिंग के लिए अपने सरकारी चैनल को चमका रही है. इसीलिए खूब विज्ञापन किया जा रहा है. इसी तरह राज्यसभा टीवी की भी खूब ब्रांडिंग की जा रही है. महिला दिवस के मौके पर इस चैनल का पेज भर का विज्ञापन अखबारों में प्रकाशित कराया गया जिसमें चैनल से जुली महिला एंकरों व कर्मियों की तस्वीर छाप कर महिला सशक्तीकरण की बात कही गई.
इन शोशेबाजी से किसी का सशक्तीकरण हो या न हो लेकिन अखबार मालिकों की सशक्तीकरण खूब हो रहा है. उन्हें जमकर विज्ञापन मिल रहा है. आम चुनाव नजदीक आते देख अखबार मालिकों ने फिर से पेड न्यूज और पैकेज की प्रणाली को अंदरखाने अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. अब तो कई बड़े अखबार नेताओं से उनकी मार्केटिंग का बाकायदा ठेका तक ले रहे हैं. इस काम में पत्रकारों को आगे किया जा रहा है. यानि जिनका काम आम जन का दुख दर्द उजागर करना था वे विशुद्ध दलाली पर उतर आए हैं.
वी आर द बेस्ट ब्लाग में सरकारी चैनलों को लेकर विज्ञापनबाजी किए जाने के प्रकरण पर एक कमेंट है, जो इस प्रकार है– ''To predict the meteorological weather, you have Mausam Bhavan. To predict the political weather, you have Doordarshan. Before every general election, the government happily dips into the pockets of taxpayers and pumps in crores of rupees to revamp the supposedly “autonomous” broadcast behemoth. And so it is in the year of the lord, 2013. Under the new information and broadcasting minister Manish Tiwari, new appointments have been made to DD News, just as Ravi Shankar Prasad had in the NDA regime before the the 2004 elections. There are expensive advertisements in the newspapers announcing its shows; there is even a Twitter account.''






