नीमच। पत्रकारिता संघर्ष का रास्ता है, जिसको सरस्वती पुत्र बनना है वह पत्रकार बनता है। इस मार्ग पर लक्ष्मी पुत्र बनने की चाह का त्याग करना पड़ता है। यह संघर्ष का रास्ता है। इस पर चलना कठिन है, जो चलते है वे आगे पहुंच जाते है। उक्त विचार ख्यातिनाम पत्रकार पद्मश्री मुजफर हुसैन ने वीणा गोपाल ट्रस्ट के बैनर पर आयोजित पत्रकारिता सम्मान समारोह में अपने मित्र वरिष्ठ पत्रकार व मीसाबंदी स्व. गोपाल खण्डेलवाल को श्रद्धा पुष्प अर्पित करते हुए व्यक्त किये।
आपने कहा कि गोपाल खण्डेलवाल मेरे सहपाठी थे, गोपाल मध्यप्रदेश पुलिस में डिवाईएसपी के लिये चयनित हुये किंतु उन्होने उस नौकरी को ठुकराकर पत्रकार व अध्यापक बनना पसंद किया। गोपाल ने कभी समझौता नहीं किया, ईश्वर मुझे भी पत्रकारिता के उस मार्ग पर चलने का साहस देना। पत्रकारिता संवैधानिक नियमों के विपरीत न हो इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिये।
आपने बताया कि 26 मई को पत्रकारिता दिवस आता है 26 मई नारद जयंती होती है। दुनिया के प्रथम पत्रकार नारद मुनि, गणेश और वेदव्यास थे, जिन्होने अपनी विवेकता एवं कुशलता के दम पर अतिथि संवादो का आदन इस प्रकार किया कि आपस में विश्वसनीयता भी बरकरार रही। नारदजी जो बात कहे वह कभी रद नही हो सकता है विष्णु के भक्त नारद थे। एक देवता से दूसरे देवता को नारदजी ने संदेश प्रदान किया। बुद्धि का देने वाला ही नारद कहलाता है नारद का पेन उनकी वीणा थी। कर्नाटक के उत्तर व दक्षिण में नारद के दो मंदिर है। आपने मंच से सांसद रघुनंदन शर्मा व विधायक यशपालसिंह सिसोदिया से कहा कि मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर पर डाक टिकिट जारी करवाने का प्रयास करे।
जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने पत्रकार गोपाल खण्डेलवाल को नमन करते हुए कहा कि एक अच्छी शुरूआत खण्डेलवाल परिवार द्वारा की गई। ऐसे प्रयास आज के युग में कठिन परिश्रम है समाज को आईना दिखाने वाले का सम्मान भी होना चाहिये। खण्डेलवाल परिवार ने पत्रकारो के सम्मान के कार्य की जो शुरूआत की है वह सराहनीय है। आपने कहा कि देश के 80 प्रतिशत लोगो को जीवन का उद्येश्य की जानकारी नही है। हम हर दिन की मुस्कराहट मे ही खुंशी ढूंढे आर्थिक युग में अंधी दौड शुरू हुई आज संयुक्त परिवार से एकल परिवार पर मनुष्य आ रहा है ऐसे अभिनव आयोजन निरंतर आयोजित होते रहे।
मंदसौर विधायक यशपालसिंह सिसोदिया ने कहा कि पत्रकारिता काफी चुनौती पूर्ण कार्य है। अखबार चलाने के लिये काफी श्रम व परिश्रम करना पड़ता है। मालवा में पत्रकारिता अखबार क्रांति के लिये नीमच जिला अग्रणी है । अखबार चलाना कठिन काम है। मन्दसौर भी नीमच का अनुसरण करता है। उन्होंने श्री खण्डेलवाल के बारे में बोलते हुए कहा कि उनके जैसा, सरल, सौम्य, मृदुभाषी व्यक्तित्व उन्होंने कभी नहीं देखा। स्व. गोपाल खण्डेलवाल के निधन से रिक्त स्थान कभी पूरा नही हो सकता हैं। अखबार चलाना कठिन काम है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राज्य सभा सांसद रघुनंदन शर्मा ने संघ व स्व. गोपाल खण्डेलवाल से जुडे अपने संस्मरणों को उपस्थित श्रोताओं को सुनाते हुए कहा कि लगभग 43 वर्ष पूर्व खण्डेलवालजी ओैर मेरा संपर्क हुआ था। गोपाल और मेरे संबंध काफी लम्बे अरसे से रहे हैं, लेकिन गोपाल ने कभी भी इस रिश्ते का राजनैतिक फायदा उठाने का प्रयास नहीं किया। जब भी मै नीमच आता हूं उनके प्रेम का अभाव लगता है, उनकी कमी को दूर करने का प्रयास उनके दोनो सुपुत्र वरूण व विवेक करेंगे। मैं सदैव उनके परिवार के साथ खड़ा हूं। उनके परिवार द्वारा उनकी स्मृति में किये जा रहे इस नैक कार्य की ख्याति पूरे प्रदेश तक फेले यह मेरी शुभकामना है।





