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सरोज सिंह से खफा विकास कुमार ने चौथी दुनिया को कहा अलविदा

साप्ताहिक अखबार चौथी दुनिया को बिहार में झटका लगा है. बिहार-झारखंड संस्करण की शुरुआत करने में, अखबार को उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों में लोकप्रिय बनाने और विज्ञापन की व्यवस्था करने में अहम भूमिका निभाने वाले विकास कुमार ने चौथी दुनिया को अलविदा कह दिया है. विकास ने आरोप लगाया है कि बिहार संस्करण के सहायक संपादक सरोज कुमार सिंह उन पर अनावश्यक दबाव बना रहे थे और प्रताड़ित कर रहे थे. इसी से तंग आकर उन्होंने यह कदम उठाया है. पिछले अक्टूबर माह से ही सरोज सिंह और विकास कुमार के बीच अनबन की शुरुआत हो गई थी और धीरे-धीरे वैचारिक मतभेद गहराते चले गये.

साप्ताहिक अखबार चौथी दुनिया को बिहार में झटका लगा है. बिहार-झारखंड संस्करण की शुरुआत करने में, अखबार को उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों में लोकप्रिय बनाने और विज्ञापन की व्यवस्था करने में अहम भूमिका निभाने वाले विकास कुमार ने चौथी दुनिया को अलविदा कह दिया है. विकास ने आरोप लगाया है कि बिहार संस्करण के सहायक संपादक सरोज कुमार सिंह उन पर अनावश्यक दबाव बना रहे थे और प्रताड़ित कर रहे थे. इसी से तंग आकर उन्होंने यह कदम उठाया है. पिछले अक्टूबर माह से ही सरोज सिंह और विकास कुमार के बीच अनबन की शुरुआत हो गई थी और धीरे-धीरे वैचारिक मतभेद गहराते चले गये.

विकास ने बताया कि चौथी दुनिया से सैलरी के रूप में जो रकम उन्हें प्राप्त होती थी (वार्षिक) उस राशि से दुगुने राशि का विज्ञापन देने की शर्त पर वह चौथी दुनिया में कार्यरत थे और अपनी जिम्मेदारी को कुशलता से निभा रहे थे. लेकिन नये वर्ष के पहले महीने में ही सरोज सिंह द्वारा विज्ञापन हेतु दिया गया दबाव इतना तनावपूर्ण था कि वहां एक मिनट भी गुजारना किसी स्वाभिमानी पत्रकार के लिये संभव नहीं था. हालांकि विज्ञापन का टार्गेट पूरा करना कोई बड़ी बात नहीं थी लेकिन समाचारों के चयन में सरोज सिंह की स्वार्थी भावनाओं का बलवती होना और अच्छी खबरों को रद्दी की टोकरी

विकास कुमार

विकास कुमार

में फेंक दिया जाना ज्यादा तकलीफ का विषय था.

मेरे जो भी समाचार और आलेख प्रकाशित होते थे, उसमें से महत्वपूर्ण और प्रभावकारी पंक्तियों को काटकर हटा दिया जा रहा था. जिस प्रकार कोई एक गाना सिनेमा को हिट और सुपर हिट बना देता है उसी प्रकार किसी समाचार की दो चार लाइनें ही अखबार और रिपोर्टर को सुर्खियों में ला देती है लेकिन मेरे समाचारों के मुख्य अंशों को हटाकर उसे साधारण बनाकर प्रकाशित करना स्वाभिमान पर ठेस पहुंचाने के समान था और चौथी दुनिया को अलविदा कहकर मैंने अपने मान-स्वाभिमान की रक्षा करने का कठोर फैसला लिया है. वैसे शीघ्र ही मैं अपनी नई पारी की शुरुआत बिहार के किसी भी शहर में हिन्दुस्तान या प्रभात खबर के साथ जुड़कर करने जा रहा हूं. इन दोनों संस्थानों में बातचीत जारी है. जल्द ही परिणाम भी सार्वजनिक कर दिये जायेंगे.

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