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सहारा के अटके मकान, निवेशक परेशान

करीब आठ माह पहले सहारा समूह ने 10 टाउनशिप परियोजना शुरू करने की घोषणा की थी। उस समय सहारा ने कहा था कि कंपनी चालू वित्त वर्ष में 58 अन्य रिहायशी परियोजना पर भी काम शुरू करेगी। लेकिन वास्तविक हालात की बात करें तो छोटे-मझोले शहरों में घोषित 10 परियोजनाओं पर काम कछुए की चाल से हो रहा है।  समूह से जुड़े सूत्रों के अनुसार, घोषित परियोजना का ब्योरा संबंधित राज्यों के प्राधिकरण में भी अब तक जमा नहीं हो पाया है। शेष 58 परियोजनाओं के लिए सहारा समूह ने काफी मात्रा में जमीन का अधिग्रहण तो किया है लेकिन उसे अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है।

करीब आठ माह पहले सहारा समूह ने 10 टाउनशिप परियोजना शुरू करने की घोषणा की थी। उस समय सहारा ने कहा था कि कंपनी चालू वित्त वर्ष में 58 अन्य रिहायशी परियोजना पर भी काम शुरू करेगी। लेकिन वास्तविक हालात की बात करें तो छोटे-मझोले शहरों में घोषित 10 परियोजनाओं पर काम कछुए की चाल से हो रहा है।  समूह से जुड़े सूत्रों के अनुसार, घोषित परियोजना का ब्योरा संबंधित राज्यों के प्राधिकरण में भी अब तक जमा नहीं हो पाया है। शेष 58 परियोजनाओं के लिए सहारा समूह ने काफी मात्रा में जमीन का अधिग्रहण तो किया है लेकिन उसे अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है।

जून 2012 को सहारा इंडिया परिवार की रियल्टी इकाई सहारा इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐंड हाउसिंग ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय के जन्मदिन पर लखनऊ में 'शुभ आगमन' नाम से एक भव्य समारोह में इन 10 परियोजनाओं को शुरू करने की घोषणा की थी। इसी तरह का कार्यक्रम सभी 10 परियोजना स्थलों पर भी किया गया था।

10 परियोजनाओं में से 9 सहारा सिटी होम्स ब्रांड के तहत किफायती हाउसिंग परियोजना थी, जबकि सहारा ग्रेस नाम से एक प्रीमियम हाउसिंग परियोजना की घोषणा की गई थी। बताया गया था कि 7 जगहों पर निर्माण कार्य चल रहा है। कुल मिलाकर सहारा ने 2012-13 के लिए 75 रिहायशी परियोजनाएं लाने की बात कही थी।किफायती मकानों की कीमत 5 से 15 लाख रुपये रखी गई थी, जबकि अन्य फ्लैट 16 से 52 लाख रुपये के थे।

बुकिंग राशि कुल कीमत का 10 फीसदी रखी गई थी। सहारा सिटी होम्स एकीकृत टाउनशिप परियोजना थी, जिसे पुणे, औरंगाबाद, जोधपुर, ग्वालियर, बरेली, सोलापुर, पोरबंदर, काशीपुर, कटनी में बनाने की बात कही गई थी जबकि सहारा ग्रेस कटक (भुवनेश्वर) में बनाया जाना था। 900 एकड़ में कुल 10 परियोजना के तहत 25,000 रिहायशी फ्लैट बनाए जाने थे। लेकिन विभिन्न वजहों से ज्यादातर जगहों पर अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

पुणे की बात करें तो वहां कुछ भी काम नहीं हुआ है और जमीन खाली पड़ी है। एक संभावित खरीदार ने कहा, 'जब हमने एक हफ्ते पहले कंपनी से संपर्क किया था तब बिक्री टीम ने कहा था कि उनके पास ब्रोशर और पैम्फलेट अभी खत्म हो गए हैं।' शहर के कई प्रॉपर्टी ब्रोकरों ने बताया कि वे इस परियोजना के साथ अब नहीं जुड़े हैं।

औरंगाबाद, पोरबंदर, जोधपुर, ग्वालियर, बरेली और सोलापुर जैसे शहरों के प्रॉपर्टी डीलरों ने कहा कि परियोजना पर बहुत काम नहीं हुआ है। सहारा इंडिया परिवार के कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस प्रमुख अभिजित सरकार से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि सभी 10 जगहों पर विकास और निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। सरकार ने कहा कि अभी सहारा के पास 18 परियोजनाएं हैं, जिनमें से 8 निर्माण के अंतिम चरण में हैं।

साभार-बीएस

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