: एक सदस्यीय जांच कमेटी कर रही है जांच : एक तरफ सहारा मुश्किलों में है तो दूसरी तरफ सहारा मीडिया प्रबंधन के लिए और मुश्किलें पैदा कर रहे हैं. खबर है कि राष्ट्रीय सहारा, लखनऊ में गाली ग्लौज के मामले को लेकर जांच बैठाई गई है. यह हादसा भी संपादक के सामने हुआ, लेकिन उन्होंने शुरुआत में कोई एक्शन नहीं लिया, जिससे प्रबंधन उनसे भी नाराज है. खबर है कि लखनऊ से जांच रिपोर्ट दिल्ली भेजी जा चुकी है. वहीं से इस मामले में निर्णय लिए जाने की संभावना है.
बताया जा रहा है कि गुरुवार की रात संपादकीय के लोगों की मीटिंग संपादक मनोज तोमर के कमरे में हो रही थी. लखनऊ में मेट्रो पर एक खबर लिखी जानी थी, डिप्टी ब्यूरोचीफ मनमोहन ने कमल दुबे को कहा कि यह खबर आप बनाइए. इस पर कमल दुबे ने कहा कि यह मामला एलडीए से जुड़ा हुआ है तथा कमिश्नर ने इस बारे में ब्रीफिंग की है, लिहाजा एलडीए और प्रशासन देखने वाला रिपोर्टर इस खबर को बेहतर ढंग से बना पाएगा.
इसके बाद कमल दुबे लोकल में एलडीए देखने वाले किसी लड़के को पूरा मामला समझाकर मीटिंग में चले आए. इस बात की जानकारी डिप्टी ब्यूरोचीफ मनमोहन को हुई. वे संपादक के केबिन में ही कमल के बारे में कहा कि कमल निहायत मक्कार, कमीना और झूठे आदमी हैं, कहते कुछ हैं करते कुछ हैं. मनमोहन द्वारा अपशब्द बोले जाने से कमल दुबे नाराज हो गए. उन्होंने कहा कि अगर आपको शिकायत है तो आप फांसी पर चढ़ा दीजिए, सजा दीजिए लेकिन इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए.
मामला बढ़ता देख संपादक मनोज तोमर ने बीच बचाव करते हुए मनमोहन से अपनी बात वापस लेने को कहा. मनमोहन ने कथित तौर पर अपनी बात वापस ली. लेकिन अन्य सहकर्मियों का कहना था कि गाली देने के बाद बात वापस लेना यह मजाक जैसा है. खैर, तत्काल मीटिंग खतम हो गई. लेकिन कमल दुबे लगातार अपमानित महसूस करते रहे. बताया जा रहा है कि इसके बाद उन्होंने शुक्रवार को इस पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत ब्यूरोचीफ विजय शंकर तथा यूनिट हेड राजेंद्र द्विवेदी को दी.
कमल दुबे की शिकायत पर राजेंद्र द्विवेदी ने पर्सनल के हेड ऋषि सहाय के एक सदस्यीय टीम को जांच की जिम्मेदारी सौंपी. ऋषि संपादक के केबिन में मौजूद लोगों से बयान लेकर इस पूरे मामले की जांच की. सूत्रों का कहना है कि इसके बाद उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट राजेंद्र द्विवेदी को सौंप दी. राजेंद्र द्विवेदी ने इस पूरे मामले को दिल्ली भेज दिया है. खैर, इस मामले का दूसरा पहलू यह रहा कि संपादक मनोज तोमर शुक्रवार की शाम तक इस मामले में कोई एक्शन नहीं लिया.
हालांकि जब उन्हें पता चला कि इस मामले की जांच यूनिट हेड करवा रहे हैं तो आनन-फानन में उन्होंने इस मामले से जुड़ी एक लिखित जानकारी दिल्ली भेजी है. हालांकि इस मामले को हल्के में लेने पर मनोज तोमर पर भी अंगुलियां उठ रही हैं. अब देखना है कि दिल्ली इस मामले में क्या निर्णय लेता है. वैसे भी पिछले दिनों यूपी स्टेट ब्यूरो को भी छोटा कर दिया गया है.






