: कानाफूसी : सहारा मीडिया में आजकल एक मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है. इस मुद्दे को जन्म दिया है सहारा ग्रुप की ओर से जारी एक आंतरिक सरकुलर ने. इस सरकुलर में कहा गया है कि सहारा मीडिया से जुड़े लोग अब क्यू शॉप की दुकान से ही आटा चावल दाल उर्फ घरेलू सामान खरीदें. इसके लिए सभी कर्मियों को उनकी सेलरी हैसियत के मुताबिक अलग-अलग कीमत के कूपन जारी किए गए हैं और कूपन में उल्लखित कीमत उनकी सेलरी से काटी जाएगी.
आपको भी पता होगा कि सहारा ग्रुप ने भी आटा चावल दाल तेल की दुकान खोल ली है, क्यू शॉप नाम से, कई शहरों में एक साथ. सहारा ने पहले लोगों को डराया, फिर दुकान खोलने की ओर कदम बढ़ाया. डराया, ये कि देश दुनिया में जो कुछ बिक रहा है, सब नकली है, जानलेवा है, इसलिए हे मनुष्यों, इधर आओ, बिलकुल पाकसाफ आइटम सहारा की क्यू शाप से खरीद ले जाओ. और, जब दुकान खुल गई तो खरीदार भी चाहिए, थोड़े बहुत नहीं बल्कि ज्यादा खरीदार चाहिए ताकि दुकान चलती नजर आए. इसलिए सहारा ग्रुप ने एक फरमान जारी कर दिया.
फरमान ये कि सहारा मीडिया के लोग अपना अन्न चावल दाल तेल घी आदि इसी क्यू शॉप से खरीदें. इसके लिए सहारा ने पच्चीस हजार रुपये नेट सेलरी पाने वाली की तनख्वाह से एक हजार रुपये और पच्चीस हजार से ज्यादा सेलरी पाने वाले के वेतन से तीन हजार रुपये काटने की घोषणा कर दी. इन रुपयों की जगह क्यू शॉप से खरीदारी के कूपन मिलेंगे और इस प्रकार सहारा मीडिया का कर्मी इन कूपनों का इस्तेमाल करने को मजबूर होगा.
इस फरमान के आने के बाद सहारा में हड़कंप मचा हुआ है. खासकर जो पच्चीस हजार रुपये से नीचे नेट सेलरी पाने वाले हैं, वे ज्यादा हाय हाय कर रहे हैं. इनका कहना है कि पहले ही कट पिट कर काफी कम तनख्वाह हाथ में आती थी, अब एक और चीज के लिए इन लोगों ने पैसे काट लिया. इनके मुताबिक, अगर कोई मीडियाकर्मी अपने गांव घर के खेत से उपजे अन्न आदि को लाकर खाता पकाता है तो वह क्यों भला क्यू शॉप से खरीदने जाए. यह तो सरासर ज्यादती है.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.
अगर आप भी इस मुद्दे पर कुछ कहना चाहते हैं या मीडिया जगत से जुड़ी किसी होनी-अनहोनी को शेयर करना चाहते हैं तो भड़ास तक अपनी बात [email protected] के जरिए पहुंचा सकते हैं.





