Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

सहारा जैसी संस्थाएं क्यों कर रही हैं बेसहारा

पहले भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजन से हाथ खींचना, फिर आईपीएल टीम छोड़ना, फिर लन्दन और अमेरिका के होटल बेचने की ख़बरों के बीच एक और नयी खबर ये है कि सहारा के चार चैनल भी दिवालिया हो रहे हैं, लगातार छंटनी के उपक्रमों के बाद अब सहारा के ही सूत्र बता रहे हैं कि सहारा के चैनलों के लिए ग्राहक तलाशे जा रहे हैं.
पहले भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजन से हाथ खींचना, फिर आईपीएल टीम छोड़ना, फिर लन्दन और अमेरिका के होटल बेचने की ख़बरों के बीच एक और नयी खबर ये है कि सहारा के चार चैनल भी दिवालिया हो रहे हैं, लगातार छंटनी के उपक्रमों के बाद अब सहारा के ही सूत्र बता रहे हैं कि सहारा के चैनलों के लिए ग्राहक तलाशे जा रहे हैं.
 
आईपीएस अमिताभ ठाकुर जैसे कुछ लोगों की ईमानदाराना पहल पर सहारा को लगा ये ग्रहण लगातार कह रहा है कि सहारा के बुरे दिन पीछा नहीं छोड़ रहे हैं. एक पुरानी कहावत भी है कि बुराई के पैर लम्बे नहीं होते. सहारा जैसी कम्पनियां कई दशकों से देश की गरीब जनता की मजबूरियों का फायदा उठा कर उन्हें सब्ज बाग दिखा कर पहले उनका पैसा अंटी करती है फिर उस पैसे को अपने पिताजी का पैसा समझ कर ऐसी जगहों पर लगाती हैं जहां से देखने पर ऐसी कम्पनियां गरीबों को अपनी पहुंच से बाहर नजर आयें और फिर बेचारों की ये पूछने की भी हिम्मत भी न हो कि उनके लिए गए पैसों का क्या किया गया और उसे कैसे वापस किया जाएगा. नतीजा जेवीजी, कुबेर, नीलांचल, अलकनंदा, शारधा, रोजवैली, परिवार डेरी, केएमजे, जादूगोड़ा जैसी सैकड़ों कम्पनियों के रूप में सामने आता है.
 
दुःखद पहलू तो ये है कि ठगी का मायाजाल बुनने के बाद लोगों को खून के आंसू रुलाने वाली ऐसी कम्पनियां जनता के पैसे के बलबूते ही उस न्याय व्यवस्था को खरीदने की कोशिश में भी जुट जाती हैं और भले खरीद न पाएं लेकिन भारतीय न्याय प्रणाली के लचर सिस्टम के कारण अपने प्राण संकट में जाने से रोकने में जरूर कामयाब होती है.
 
सरकार,प्रशासन, सिस्टम जैसे शब्द इन कम्पनियों के जाल को फैलने से रोकने में किसी न किसी रूप में असमर्थ लगते हैं क्योंकि करोड़ों-अरबों के मायाजाल में किसी को भी फौरी तौर पर तो चकाचौंधी में लिया ही जा सकता है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण पश्चिम बंगाल है जहां शारधा ग्रुप का मालिक जेल में ऐश की रोटियां तोड़ रहा है और मुख्यमंत्री जनता से ही पैसा उगाही कर उन्हीं को लौटाने का उपक्रम कर रही हैं.
 
लेखक हरिमोहन विश्वकर्मा से सम्पर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.
Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...