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सहारा मीडिया के हेड उपेंद्र राय के खिलाफ जारी ‘टेप’ फुस्स हुआ

: कानाफूसी : सहारा मीडिया से खबर है कि इसके हेड उपेंद्र राय के खिलाफ कुछ लोगों ने एक टेप जारी करके उसे सहारा प्रबंधन के पास भेज दिया है. इस टेप में उपेंद्र राय सहारा के ही किसी शीर्ष अधिकारी से बातचीत कर रहे हैं और बातचीत के दौरान कई बातें कहतें सुनाई पड़ रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि उपेंद्र राय से खार खाए कुछ लोगों ने एक पुराने टेप के कई अंशों को काटपीट जोड़ कर स्टिंग टाइप का दिखाते बताते हुए सहारा के अंदर कई बड़े लोगों के पास मेल कर दिया है.

: कानाफूसी : सहारा मीडिया से खबर है कि इसके हेड उपेंद्र राय के खिलाफ कुछ लोगों ने एक टेप जारी करके उसे सहारा प्रबंधन के पास भेज दिया है. इस टेप में उपेंद्र राय सहारा के ही किसी शीर्ष अधिकारी से बातचीत कर रहे हैं और बातचीत के दौरान कई बातें कहतें सुनाई पड़ रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि उपेंद्र राय से खार खाए कुछ लोगों ने एक पुराने टेप के कई अंशों को काटपीट जोड़ कर स्टिंग टाइप का दिखाते बताते हुए सहारा के अंदर कई बड़े लोगों के पास मेल कर दिया है.

विरोधियों की कोशिश इस टेप को कांड व बम का रूप देकर उपेंद्र राय को हिलाने की थी. पर सहारा प्रबंधन को उपेंद्र राय ने सारी असलियत बता दी तो विरोधियों का बम पटाखा भी न बन सका और टांय टांय फुस्स हो गया. पता चला है कि उपेंद्र राय इस मसले पर शांत नहीं बैठने वाले और विरोधियों को सबक सिखाने के मूड में हैं.

सूत्रों के मुताबिक वे टेप जारी करने वालों का पता लगाने के लिए पुलिस का सहारा ले रहे हैं और अपनी मानहानि को लेकर कार्रवाई करने के लिए बिलकुल तैयार बैठे हैं. देखना है कि इस कवायद का क्या नतीजा निकलता है पर कहने वाले कहते हैं कि उपेंद्र राय की किस्मत कुछ ऐसी है कि जब वे शीर्ष पर तैनात होते हैं, तो कुछ न कुछ ऐसा हो जाता है कि उनकी कुर्सी हिलने लगती है.

पिछली बार राडिया टेप कांड और फिर ईडी अफसर राजकेश्वर सिंह की सक्रियता उपेंद्र राय के लिए बवाल-ए-जान बन गई तो इस बार सेबी ने जो बड़ा झटका दिया है, उसको मैनेज न कर पाना और टेप कांड की चर्चाएं उपेंद्र राय के लिए भारी पड़ रही हैं.

वैसे, सहारा मीडिया का ये नियम है कि यहां जितने लोग सत्ता में रहते हैं, उतने ही लोग विपक्ष में रहते हैं और इनमें तीव्र टकराव हर क्षण चला करता है. जैसे देश में पांच साल बाद विपक्षी पार्टी सत्ता में आ जाती है उसी तरह सहारा में भी कुछ वर्षों के बाद विपक्ष के लोगों को सत्ता में ला दिया जाता है. सो, यह क्रम जारी रहता और सहारा में कार्यरत लोगों का जीवन इसी सब उठापटक की चर्चाओं के बीच गुजरता रहता है.

अगर आपके अगल बगल या किसी संस्थान में कोई कानाफूसी चल रही हो तो उसे भड़ास के पास भेजें ताकि उसे सब तक पहुंचा दिया जाए. भड़ास के पास [email protected] के जरिए अपनी बात भेज सकते हैं.

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