सहारा इंडिया परिवार ने सालों बाद एक अच्छा निर्णय लिया, लेकिन वही हुआ जिसका डर था। कुछ पत्रकार साथियों के सपने को कुछ दलाल टाइप पत्रकारों ने मिट्टी में मिला दिया। कुछ महीने पहले ‘राष्ट्रीय सहारा’ का जिम्मा दोबारा संभालने के बाद सहारा समूह के छोटे मालिक जेबी राय ने आते ही पुनीत कार्य यह किया कि सभी स्ट्रिंगरों, रिपोर्टरों और डेस्क के लोगों को कन्फर्म कर स्टॉफर बनाने का आदेश अधीनस्थों को दिया। सालों से बतौर स्ट्रिंगर अल्प वेतन पर काम कर रहे पत्रकारों के लिये यह आदेश खुशियां और सपने लेकर आया। सब खुश थे कि चलो अब हम भी वास्तव में पत्रकार कहलाएंगे, लेकिन स्थापना के दिन से भाई-तीजावाद, गुटबाजी और गंदी राजनीति का अड्डा बनी राष्ट्रीय सहारा की देहरादून यूनिट ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया लगता है।
नोएडा मुख्याय से करीब एक पखवाड़े पूर्व स्ट्रिंगरों को स्टाफर बनाने के लिए परीक्षा कराने का आदेश आया था जिसके लिए 26 अगस्त का दिन तय किया गया। हालांकि सहारा के कुछ घाघ पत्रकारों ने अपने कुछ स्ट्रिंगर गुर्गों को खुलेआम कहना शुरू कर दिया कि उन्हें हम परीक्षा पास कराएंगे और स्टाफर भी बनवाएंगे। इनमें कुछ स्ट्रिंगरों को तो बाकायदा परचा भी दिलवाने के दावे किये गए। और हुआ भी वही। 26 अगस्त को परीक्षा हुई तो कुछ लोगों को वास्तव में जमकर नकल करायी गयी। बाकी स्ट्रिंगर निराश-मायूस हुए और आक्रोशित भी। लेकिन क्या करते, विरोध की कुव्वत किसी में नहीं थी। यद्यपि पता चला है कि अगले दिन किसी स्ट्रिंगर ने परीक्षा में भारी नकल होने की शिकायत नोएडा कर दी जिस पर देहरादून के संपादकीय अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है। यह भी चर्चा है कि यह परीक्षा रद्द की जा रही है और इसी के साथ स्ट्रिंगर भाइयों का स्टाफर बनने का सपना भी बिखरता नजर आ रहा है।
सहारा से जुड़े एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.