Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal

सुख-दुख...

सहारा वालों ने कैश में किया हजारों करोड़ रुपये का लेन-देन, सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सवाल उठाया कि सहारा ने निवेशकों को बीस हजार करोड़ रुपए लौटाने के लिए अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ रुपए के धन का लेन-देन कैसे नकदी में किया। इससे पहले, सेबी ने आरोप लगाया था कि सहारा समूह ने ऐसे धन के लेन-देन के बारे में कोई बैंक स्टेटमेन्ट पेश नहीं किया है। न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायामूर्ति जे एस खेहड़ की खंडपीठ ने सेबी से यह पता लगाने के लिए कहा है कि क्या कंपनी कानून और भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों के तहत इतनी बड़ी रकम का नकदी में लेन-देन किया जा सकता है।

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सवाल उठाया कि सहारा ने निवेशकों को बीस हजार करोड़ रुपए लौटाने के लिए अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ रुपए के धन का लेन-देन कैसे नकदी में किया। इससे पहले, सेबी ने आरोप लगाया था कि सहारा समूह ने ऐसे धन के लेन-देन के बारे में कोई बैंक स्टेटमेन्ट पेश नहीं किया है। न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायामूर्ति जे एस खेहड़ की खंडपीठ ने सेबी से यह पता लगाने के लिए कहा है कि क्या कंपनी कानून और भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों के तहत इतनी बड़ी रकम का नकदी में लेन-देन किया जा सकता है।

न्यायाधीशों ने कहा, ‘हम समझते हैं कि रिजर्व बैंक के ऐसे नियम हैं जिनके तहत दस लाख रुपए से अधिक का लेन देन चेक से ही करना होता है।’ न्यायालय ने सेबी से कहा कि रिजर्व बैंक के नियमों के बारे में जानकारी प्राप्त की जाए। इस मामले की आज सुनवाई शुरू होते ही सेबी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरिवन्द दातार ने कहा कि सहारा समूह ने इस धन के बारे में अपनी फर्मों के बैंक स्टेटमेन्ट नहीं दिए हैं।

उन्होंने कहा कि सहारा का दावा है कि उसने अपने निवेशकों को धन लौटा दिया है और कंपनी ने यह लेन-देन नकद किया है। उन्होंने कहा, ‘वे कहते हैं कि सब कुछ नकद किया गया और इस वजह से कोई बैंक स्टेटमेन्ट नहीं है। वह कहते हैं कि सहारा क्रेडिट सहकारी समिति ने सहारा इंडिया को मई-जून, 2012 में 16000 करोड़ रुपए नकद दिए थे।’ सहारा समूह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने दलील दी कि उन्होंने न्यायालय में दाखिल सारे दस्तावेजों का अवलोकन नहीं कर सके हैं, इसलिए उन्हें सेबी के आरोपों का जवाब देने के लिए वक्त चाहिए।

न्यायालय ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद इस प्रकरण को 20 फरवरी के लिए स्थगित कर दिया। शीर्ष अदालत ने इससे पहले सहारा समूह को 22885 करोड रुपए के स्रोत की जानकारी देने का निर्देश दिया था। सहारा ने दावा किया था कि उसने निवेशकों को यह रकम लौटा दी है। न्यायालय ने इस धन के स्रोत की जानकारी देने से इंकार करने पर सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय और समूह को सख्त चेतावनी देते हुए स्पष्ट संदेश दिया था कि वह अपने निर्देशों का उल्लंघन करने के मामले में कार्रवाई करने के लिए ‘असहाय’ नहीं है।

न्यायालय ने कहा था, ‘यह मत सोचिए कि न्यायालय असहाय है। हम सीबीआई और कंपनियों के पंजीयक से आपके खिलाफ जांच करने के लिए कह सकते हैं। हम असहाय नहीं है। यदि आप नहीं बतायेंगे तो हम धन के स्रोत का पता लगाएंगे।’ न्यायालय ने 31 अगस्त, 2012 को सहारा समूह को निर्देश दिया था कि निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपए नवंबर के अंत तक लौटाए जाएं। न्यायालय ने बाद में यह अवधि बढाते हुए इसकी कंपनियों को 5120 करोड़ रुपए तत्काल ओर दस हजार करोड़ रुपए जनवरी, 2013 के प्रथम सप्ताह में तथा शेष रकम का फरवरी के पहले सप्ताह में भुगतान करने का निर्देश दिया था।

सहारा समूह ने 5120 करोड़ रुपए का ड्राफ्ट पांच दिसंबर, 2012 को ही जमा कर दिया था लेकिन शेष राशि का भुगतान करने में आरोपी विफल रहे थे। न्यायालय ने सहारा समूह की दो कंपनियों, उनके प्रमोटर सुब्रत राय और निदेशक वंदना भार्गव, रवि शंकर दुबे तथा अशोक राय चौधरी को निवेशकों से एकत्र की गई राशि सेबी को लौटाने का निर्देश दिया था।

इसमें विफल रहने पर सेबी ने राय, सहारा इंडिया रियल इस्टेट कार्प लि और सहारा इंडिया हाउसिंग इंवेस्टमेन्ट कार्प लि तथा उनके निदेशकों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही के लिए मामला दायर किया था जो इस समय लंबित है। (एजेंसी)

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadas … मोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia  …

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...