सहारा समूह के मुखिया सुब्रत रॉय और देश भर में फैले उनके कारोबारी समूह के भविष्य का क्या होगा? इस पर आज सबकी नजरें टिकी हुई हैं. दरअसल सुब्रत रॉय और उनकी कंपनी के प्रमुख अधिकारियों को सेबी ने बुधवार को ख़ुद पेश होने को कहा है. सेबी ने ये कदम सुब्रत रॉय की निजी संपत्तियों के आकलन के लिए बुलाया है ताकि उन संपत्तियों को बेचकर निवेशकों के पैसे लौटाए जाएं.
सेबी ने इन लोगों से सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा हाउसिंग इवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) और सहारा इंडिया रियल स्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) के सभी निवेश और संपत्ति के बार में जानकारी मांगी है. इसके अलावा सेबी ने सुब्रत रॉय और अन्य अधिकारियों के बैंक खातों की जानकारी के साथ साथ 2007-08 से लेकर अब तक जमा की गई आयकर रिटर्न का विवरण भी मांगा है.
क्या करेंगे सुब्रत रॉय? : हालांकि सहारा समूह की ओर से अब तक ये नहीं बताया गया है कि सेबी के सामने सुब्रत रॉय और कंपनी के दूसरे अधिकारी अशोक रॉय चौधरी, रवि शंकर दूबे और वंदना भार्गव पेश होंगे या नहीं. इसके अलावा सेबी ने इन लोगों से अपनी संपत्ति और निवेश के बारे में जानकारी देने को कहा था. सहारा की ओर से ये भी नहीं बताया गया है कि मांगी गई जानकारी सेबी को दी गई है या नहीं.
अगर ये लोग सेबी के सामने पेश नहीं होते हैं, तो सेबी इन लोगों के साथ-साथ दोनों कंपनियों की संपत्ति को बेचकर निवेशकों के पैसे लौटाने की इकतरफा व्यवस्था को अमल में ला सकती है. हालांकि सहारा समूह ने कई मौकों पर और कई बार तो अख़बारों में विज्ञापनों के जरिए सेबी पर ये आरोप लगाया है कि उनके अधिकारी सुब्रत रॉय को मिलकर अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दे रहे हैं.
बढ़ सकती है मुश्किलें : वैसे सहारा समूह ने सेबी के उस आदेश के ख़िलाफ़ प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की है, जिसमें सेबी ने सहारा समूह के बैंक खातों, संपत्तियों और निवेश को सील करने को कहा था. इस मामले में 13 अप्रैल को सुनवाई होनी है. सहारा की संपत्तियों में पुणे के नजदीक एम्बी वैली के अलावा दिल्ली, मुंबई और देश भर के अन्य शहरों की संपत्तियों के साथ शेयर, म्यूचल फंड और अन्य निवेश शामिल हैं.
इसी महीने के अंत में सुप्रीम कोर्ट में उस मामले की सुनवाई भी होगी जिसमें सेबी ने सुब्रत रॉय को गिरफ्तार करने और देश से बाहर जाने पर रोक लगाने का आदेश दिया था. ये पूरा मामला तीन करोड़ निवेशकों के चौबीस हजार करोड़ रुपये लौटाने से जुड़ा है.
सहारा ने पैसे नहीं लौटाए : सहारा हाउसिंग इवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) और सहारा इंडिया रियल स्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) के ख़िलाफ़ अपने दो अलग-अलग आदेशों में सेबी ने कहा है कि इन दोनों कंपनियों ने बॉन्ड धारकों से 6,380 करोड़ और 19,400 करोड़ रुपए की राशि जुटाई और इसमें 'विभिन्न अनियमितताएं' बरती गईं. सुप्रीम कोर्ट ने 2012 के अगस्त में सहारा ग्रुप को आदेश दिया था कि वो निवेशकों को 15 प्रतिशत ब्याज के साथ उनका पैसा लौटाए और सेबी से इस काम को सुगम बनाने को कहा था.
लेकिन सहारा समूह निर्धारित समय के भीतर निवेशकों के पैसे लौटाने में असमर्थ रहा है. इससे पहले सहारा समूह ने कोशिश की थी कि कोर्ट उन्हें ये पैसा चुकाने के लिए कुछ और समय दे, लेकिन क्लिक करें सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस याचिका को ख़ारिज कर दिया और साथ ही उन्हें फटकार भी लगाई. (बीबीसी)






