Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

सहारा समूह की दूसरी कंपनियां भी झुलस सकती हैं सेबी की आंच में

मुंबई। सेबी और सहारा ग्रुप के बीच लड़ाई का असर ग्रुप की दूसरी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। सेबी ने सहारा ग्रुप की दो कंपनियों को इनवेस्टर्स के 24,000 करोड़ रुपए लौटाने को कहा है। सहारा ग्रुप का दावा है कि उसने इनवेस्टर्स के पैसे लौटा दिए हैं, लेकिन सेबी उसके दावे को मानने को तैयार नहीं है। सहारा ग्रुप का बिजनेस इंश्योरेंस से लेकर मीडिया तक फैला है। सहारा अगर अपने कई बिजनेस की सुरक्षा के लिए ट्रस्ट बनाने जैसा कदम नहीं उठाता है, तो उसे अपनी कुछ कंपनियों के कंट्रोल से हाथ धोना पड़ सकता है।

मुंबई। सेबी और सहारा ग्रुप के बीच लड़ाई का असर ग्रुप की दूसरी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। सेबी ने सहारा ग्रुप की दो कंपनियों को इनवेस्टर्स के 24,000 करोड़ रुपए लौटाने को कहा है। सहारा ग्रुप का दावा है कि उसने इनवेस्टर्स के पैसे लौटा दिए हैं, लेकिन सेबी उसके दावे को मानने को तैयार नहीं है। सहारा ग्रुप का बिजनेस इंश्योरेंस से लेकर मीडिया तक फैला है। सहारा अगर अपने कई बिजनेस की सुरक्षा के लिए ट्रस्ट बनाने जैसा कदम नहीं उठाता है, तो उसे अपनी कुछ कंपनियों के कंट्रोल से हाथ धोना पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अगर 'सहारा' पैसा लौटाने में नाकाम रहता है तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर पैसे की रिकवरी के लिए प्रॉपर्टी के अटैचमेंट और सेल और बैंक एकाउंट की फ्रीजिंग जैसे सभी कानूनी तरीकों का इस्तेमाल कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में 'सहारा' का मतलब उसकी दो कंपनियों से था। इस आदेश के बाद सेबी ने दोनों कंपनियों और उसके तीन डायरेक्टर्स और सुब्रत राय के एसेट्स अटैच करने के लिए कदम उठाए हैं। सहारा ने इसके खिलाफ सिक्योरिटीज अपेलेट ट्राइब्यूनल का दरवाजा खटखटाया है। उसने रॉय के एसेट्स फ्रीज करने के सेबी के फैसले को चैलेंज किया है।

ग्रुप का कहना है कि रॉय उन कंपनियों में डायरेक्टर नहीं हैं, जिन्हें इनवेस्टर्स का पैसा वापस करने के लिए कहा गया है। रॉय और ग्रुप के दूसरे मेंबर्स को सेबी के उनके बैंक एकाउंट्स में रखे पैसे को जब्त करने या उनके विशाल घर का पजेशन लेने को लेकर ज्यादा फिक्र नहीं है। इसके बजाय उन्हें रेगुलेटर के ग्रुप कंपनियों में रॉय के मालिकाना हक वाले शेयरों के अटैच होने की चिंता है। अब तक अदालती लड़ाई में इन शेयरों पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है।

सहारा की मौजूदगी कई बिजनेस में हैं। इसमें एसेट मैनेजमेंट, लाइफ इंश्योरेंस, हॉस्पिटैलिटी, एंटरटेनमेंट चैनल शामिल हैं। इनके अलावा एम्बी वैली जैसी टाउनशिप पर उसका अधिकार है। विदेश में भी ग्रुप के होटल और प्रॉपर्टी हैं। अगर ग्र्रुप की कंपनियों के ज्यादा शेयरों पर रॉय का मालिकाना है तो इन शेयरों के अटैचमेंट से ग्र्र्रुप की दूसरी कंपनियों में उनके ओनरशिप इंटरेस्ट पर असर पड़ सकता है। इन कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी में कमी आ सकती है। सैट का फैसला चाहे जो भी आए, सेबी या सहारा के सुप्रीम कोर्ट जाना तय है। तब पर्सनल लायबिलिटी और मनी फ्लो का पता लगाने जैसे मसले खड़े होंगे। इस तरह सहारा ग्रुप का काफी कुछ दांव पर लगा दिखता है। यह मसला सिर्फ 24,000 करोड़ रुपए का नहीं है, जो सहारा की दो कंपनियों को इनवेस्टर्स को लौटाने हैं। (ईटी)

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...