Abhishek Srivastava : चांदनी चौक के चुनिंदा ''शहरी मुसलमानों'' से ibnopenmike में Sagarika Ghose ने जिस किस्म के सवाल मुस्लिम अस्मिता को लेकर पूछे, वे बेहद गैर-जि़म्मेदाराना पत्रकारिता के उदाहरण थे। हर एक सवाल पर ऐसा लग रहा था गोया वे अपनी बात उनके मुंह में डालकर नरेंद्र मोदी के पक्ष में कुछ न कुछ निकलवाना चाह रही हों। अगर यही काम कोई हिंदी का पत्रकार करता, तो उसे तुरंत हिंदू सांप्रदायिक करार दिया जाता। मुकेश अम्बानी के पैसे से चलने वाली सीएनएन-आइबीएन की पत्रकारिता चूंकि अंग्रेज़ी है इसलिए सेकुलर है।
मुझे कहने में कोई हिचक नहीं कि आज रात का ओपेन माइक दंगाई पत्रकारिता का एक विशिष्ट उदाहरण है। जिस तरीके से देश की हिंदी पट्टी में मुसलमानों को उकसा कर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने का काम टीवी मीडिया के कुछ जमे-जमाए चेहरे कर रहे हैं, उनकी साफ़-साफ़ पहचान कर ली जानी चाहिए। आने वाले निज़ाम में ये ही हिंदू राष्ट्र के सबसे बड़े लाभार्थी होंगे।
युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.






