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सागरिका घोष को मोदी की आलोचना करने वाले ट्वीट न करने की हिदायत!

Brijesh Singh : कई मीडिया संस्थानों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि कैसे वहां मोदी की आलोचना का स्थान खत्म हो रहा है. मीडिया जगत से जुड़े लोग बताते हैं कि कैसे मोदी के प्रति आलोचनात्मक रवैया रखने के कारण टीवी 18 समूह के अंग्रेजी समाचार चैनल सीएनएन आईबीएन में वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष पर लगातार दबाव बना हुआ है. उन्हें मोदी की आलोचना करने वाले ट्वीट न करने की हिदायत तक दी गई है.

Brijesh Singh : कई मीडिया संस्थानों से ऐसी खबरें आ रही हैं कि कैसे वहां मोदी की आलोचना का स्थान खत्म हो रहा है. मीडिया जगत से जुड़े लोग बताते हैं कि कैसे मोदी के प्रति आलोचनात्मक रवैया रखने के कारण टीवी 18 समूह के अंग्रेजी समाचार चैनल सीएनएन आईबीएन में वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष पर लगातार दबाव बना हुआ है. उन्हें मोदी की आलोचना करने वाले ट्वीट न करने की हिदायत तक दी गई है.

स्क्रॉल डॉट इन वेबसाइट से बातचीत में सागरिका बताती भी हैं कि कैसे मोदी समर्थकों के कारण इंटरनेट पर मोदी की आलोचना करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है और कैसे धीरे-धीरे यह असहिष्णुता इंटरनेट के बाहर भी फैल रही है. वे कहती हैं, ‘पहले भी मैंने कई मौकों पर कांग्रेस और गांधी परिवार की आलोचना की है, लेकिन कभी मुझे किसी ने जान से मारने, गैंग रेप करने या नौकरी से निकालने की धमकी नहीं दी.’

सूत्र बताते हैं कि मोदी के प्रति आलोचनात्मक रवैया रखने वाले आईबीएन लोकमत के संपादक निखिल वागले पर भी प्रबंधन का दबाव है. वागले ने हाल ही में ट्विटर पर टिप्पणी भी की थी- ‘इंदिरा गांधी ने आपातकाल के समय पत्रकारों को डराने धमकाने काम किया. लेकिन वे सफल नहीं हो पाईं. आरएसएस और मोदी को इतिहास से सबक लेना चाहिए. पत्रकारों को धमकाना बंद करिए नहीं तो यह दांव उलटा पड़ जाएगा.’

अंग्रेजी अखबार द हिंदू के पूर्व संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के संस्थान छोड़ने के पीछे भी मोदी का हाथ होने की अपुष्ट खबरें मीडिया जगत में आती रहीं. छह फरवरी को ट्विटर पर उनकी टिप्पणी आई- आपातकाल के समय में जब मीडिया मालिकों को झुकने के लिए कहा गया तो वे रेंगने लगे. इसी तर्ज पर आदेश पाकर कई मीडिया मालिकों ने फिर रेंगने की शुरुआत कर दी है जबकि आदेश देने वाला अभी सत्ता में आया भी नहीं है.’

उदाहरण और भी हैं. अंग्रेजी पत्रिका ओपन के राजनीतिक संपादक हरतोष सिंह बल को मैनेजमेंट द्वारा संस्थान छोड़ने के लिए कहने के पीछे भी मोदी फैक्टर बताया गया. चर्चा है कि मैनेजमेंट बल द्वारा अपने लेखों में मोदी की आलोचना से नाराज था. गुजरात में मोदी की आलोचना करने वाले पत्रकारों पर देशद्रोह का मुकदमा करने से लेकर तमाम तरह से उन्हें प्रताड़ित करने के उदाहरण भरे पड़े हैं. यानी भविष्य के लिए आशंकाओं की तादाद आशाओं से ज्यादा है.

तहलका में सीनियर करेस्पांडेंट के रूप में कार्यरत पत्रकार बृजेश सिंह के फेसबुक वॉल से.

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