साधना न्यूज एमपी-सीजी अपने स्ट्रिंगरो को बेवकूफ़ बना रहा है. जुलाई 2011 के बाद स्टोरी का कोई पैसा नहीं मिला है. दिसम्बर माह में एमपी के सभी ब्यूरो पर स्ट्रिंगरों की मीटिंग की गई. इस मीटिंग में भोपाल ब्यूरो के संजीव श्रीवास्तव आये थे. बड़े-बड़े सपने दिखाते हुए बड़ी-बड़ी बातें की गई और कहा गया कि जनवरी माह से आप सभी को नियमित रूप से भुगतान मिलेगा और सभी को रिपोर्टर बना कर फिक्स सेलरी दी जाएगी, लेकिन मार्च माह ख़तम होने को है कुछ भी आज तक नहीं मिला.
और जिस तरह की स्थिति है आने वाले समय में कुछ मिलता दिखाई नहीं पड़ रहा है. न्यूज़ चैनल वाले यह भूल जाते हैं कि स्ट्रिंगर न्यूज नही भेजेंगे तो चैनल क्या दिखायेगा? स्ट्रिंगर किसी भी न्यूज़ चैनल की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और जब भुगतान की बात आती है तो यह न्यूज़ चैनल वाले इस महत्वपूर्ण कड़ी स्ट्रिंगरों को भूल जाते हैं. क्या यह रूट लेबल पर मेहनत करने वाले स्ट्रिंगरों के साथ उचित व्यवहार है.
एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.
इस संदर्भ में पूछे जाने पर भोपाल ब्यूरो चीफ अजय त्रिपाठी ने बताया कि यह बिल्कुल गलत है. जनवरी तक तो सभी स्ट्रिंगरों के पेमेंट दे दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि सिर्फ उन स्ट्रिंगरों के पेमेंट रूके होंगे, जिनके उपर विज्ञापन का बकाया होगा. कंपनी कई स्थानों पर एजेंसी की सेवाएं लेते है, लिहाजा एजेंसी के पैसे क्लीयर नहीं होने के चलते उनका पेमेंट नहीं हुआ होगा. वैसे भी कंपनी के वरिष्ठों ने जनवरी से फिक्स एमाउंट का फार्मेट तैयार कर रखा है, स्ट्रिंगरों को न्यूनतम स्टोरी लिमिट बता दी जाएगी और उन्हें फिक्स सेलरी दी जाएगी. जिनके यहां कंपनी का बकाया है, उनका बकाया पूरा होने पर ही पेमेंट किया जाएगा.





