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सिद्ध पीठ में धोती पहनकर जाने का रिवाज है, इसलिए पत्रकारों ने पैंट उतारा

: खीझ निकालने के लिए पत्रकारों की तस्‍वीर को गलत तरीके से पेश किया गया : आप सभी ने ''गिफ्ट-पैसा पाने के लिए पैंट तक उतार दी पत्रकारों ने'' शीर्षक की खबर को पढ़ा होगा और पढ़ने के बाद इन पत्रकारों के बारे में अपने अपने मुताबिक नजरिया बनाया होगा। हर व्यक्ति को अपने-अपने तरीके से सोचने की आजादी है। मैं इस प्रकरण के बारे में कुछ तथ्य रखना चाहता हूं। मेरा पहला सवाल आप सभी पाठकों से ये है कि क्या आप किसी मंदिर या मस्जिद में जूता पहनकर जा सकते है?

: खीझ निकालने के लिए पत्रकारों की तस्‍वीर को गलत तरीके से पेश किया गया : आप सभी ने ''गिफ्ट-पैसा पाने के लिए पैंट तक उतार दी पत्रकारों ने'' शीर्षक की खबर को पढ़ा होगा और पढ़ने के बाद इन पत्रकारों के बारे में अपने अपने मुताबिक नजरिया बनाया होगा। हर व्यक्ति को अपने-अपने तरीके से सोचने की आजादी है। मैं इस प्रकरण के बारे में कुछ तथ्य रखना चाहता हूं। मेरा पहला सवाल आप सभी पाठकों से ये है कि क्या आप किसी मंदिर या मस्जिद में जूता पहनकर जा सकते है?

इस सवाल का जवाब आप ना में ही देंगे। कुछ ऐसा ही उक्त आश्रम की नियम है, जिसके बारे में सचित्र खबर छपी है कि पत्रकार लोग गिफ्ट के लिए पैंट उतार कर अंदर पहुंचे। यह आश्रम गाजीपुर के बयपुर देवकली में स्थित है। बताया जाता है कि यह गंगादास बाबा की सिद्ध पीठ है, जहां पर यह नियम है कि कोई भी आदमी पाजामा-पैण्ट तथा कोई भी महिला सलवार पहनकर अन्दर नहीं जा सकती है। पुरुषों को धोती व महिला को साड़ी में ही अन्दर जाना होता है। इसी स्थान पर इससे पूर्व कई राजनेता व बड़े अधिकारी भी गये हैं। उन लोगों ने भी अपना पैंट उतारकर वहां रखी धोती पहनी थी तभी अंदर गए थे। उसी नियम व श्रद्धा को ध्यान में रखकर अगर पत्रकारों ने अपनी पैंट उतार कर धोती पहना व अन्दर दर्शन व पूजन के लिए गये तो क्या गलत किया है?

रही बात पैसा व गिफ्ट पाने की तो इस बारे में बताना चाहूंगा कि जिस राकेश पाण्डेय ने तस्वीर को गलत तरीके से पेश किया है, उसे आश्रम के लोगों द्वारा बुलाया नहीं गया था, जिसकी खीझ वो दूसरे पत्रकारों पर निकाल रहे हैं। अब जरा इन पत्रकार भाई साहब के बारे में भी जान लें तो बेहतर होगा। ये जनाब पूरे जिले में अपने आप को स्टार न्यूज का पत्रकार बताते हैं। जो पिछले दिनों 650 रुपया प्रति घंटा के दर से विज्ञापन बुक करते थे, जिसके लिए बाकायदा रसीद भी दिया करते थे। आज भी धड़ल्ले से ये काम किया करते हैं, जिसका खुलासा इसी भडास4मिडिया ने किया था। उक्त विज्ञापन को लेकर स्टार न्यूज के लखनऊ बैठे लोगों या दिल्ली बैठे लोगों ने कोई विरोध या कारवाई नहीं की बल्कि भड़ास4मिडिया पर ही अपना बयान दे दिया कि उक्त नाम का कोई भी संवाददाता गाजीपुर में नहीं है, जबकि आज भी वो अपने ऑफिस स्टार न्यूज और न्यूज एक्सप्रेस का बड़ा सा बोर्ड लगवा रखा है।

वर्तमान समय में ये जनाब न्यूज एक्सप्रेस के लिए भी काम करते हैं, लेकिन इनका चैनल के लिए काम कम और माइक आईडी के रसूख पर दूसरे काम करना ज्यादा है। इनके बारे में और जान लें। ये जनाब मऊ जनपद के सरायलखंसी थाने में 376 से लेकर आईपीसी की कई धाराओं से सुशोभित हैं। वर्ष 2007 में जनपद गाजीपुर के आमघाट में एक ही परिवार के 5 लोगों की संदिग्ध स्थिति में मौत हुई थी, जहां पर ये पत्रकारिता के नाम पर पहले पहुंचे और मृतकों का मोबाइल चुरा कर निकल पडे़, जिसके एवज में लाखों कमाया और आज तक उक्त केस का पर्दाफाश नहीं हो पाया। पुलिस ने इस बात की जानकारी होने पर इन्हें गिरफ्तार करना चाहा तो पहले ये पत्रकारिता का रौब दिखाने लगे पर यह काम नहीं आया और अन्त में पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा, जहां पर ये कई महीनों तक जेल की शोभा भी बढ़ाते रहे।  उक्त खबर को गलत तरीके से पेश करने में ये कोई अकेले नहीं हैं बल्कि पर्दे के पीछे इलेक्ट्रानिक मीडिया से जुडे कुछ ऐसे पत्रकार भी हैं, जो कभी किसी खबर में नहीं जाते हैं बल्कि अपने चेलों से काम कराते हैं, जिनके चेले भी उस आश्रम पर पहुंचे थे।

अनिल कुमार

गाजीपुर 

 

 
 

 
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