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सिहोर में सभासद ने किया पत्रकार आमिर खान से बदतमीजी, नोट बुक नाली में फेंका

सिहोर : जहां एक और  सिहोर नगर पालिका प्रशासन सिहोर नगर को स्वच्छ रखने की मुहिम चला रहा है तो वही खुद नगर पालिका के कर्मचारी नगर को अपने ही कार्य से गन्दा कर रहे हैं। हाल ही में ऐसा ही उदाहरण सामने आया है। खुद को नगर पालिका का कर्मचारी बताने वाला दिनेश उपाध्याय सिहोर के वार्ड नंबर 32 में घर घर जाकर सर्वेक्षण के नाम पर लोगों को भ्रमित कर जानकारी के नाम पर लोगों के घर में घुसने की कोशिश करता है। और बेतुकी जानकारी मांगता है। सर्वेक्षण फॉर्म पर हस्ताक्षर करने का दबाव भी डालता है।

सिहोर : जहां एक और  सिहोर नगर पालिका प्रशासन सिहोर नगर को स्वच्छ रखने की मुहिम चला रहा है तो वही खुद नगर पालिका के कर्मचारी नगर को अपने ही कार्य से गन्दा कर रहे हैं। हाल ही में ऐसा ही उदाहरण सामने आया है। खुद को नगर पालिका का कर्मचारी बताने वाला दिनेश उपाध्याय सिहोर के वार्ड नंबर 32 में घर घर जाकर सर्वेक्षण के नाम पर लोगों को भ्रमित कर जानकारी के नाम पर लोगों के घर में घुसने की कोशिश करता है। और बेतुकी जानकारी मांगता है। सर्वेक्षण फॉर्म पर हस्ताक्षर करने का दबाव भी डालता है।

जब पत्रकार आमिर खान द्वारा सर्वेक्षण करने आया दिनेश उपाध्याय से जानकारी व आदेश के बारे में पूछा गया तो न तो सर्वेक्षण करने आया नगर पालिका कर्मचारी के पास सर्वेक्षण करने का कारण पता था और न कोई आदेश पेपर पास था। न ही सर्वेक्षण करने का उद्देश पता था। एक आदेश की कॉपी दिनेश उपाध्याय ने पत्रकार को दिखाई जो कि नगर पालिका द्वारा व्यक्तिगत आदेश दिनेश उपाध्याय को दिया गया था। जिस पर लिखा था – "अगर सर्वेक्षण  20-02-2013 तक पूरा नहीं हुआ तो वेतन काट दिया जाएगा साथ ही नौकरी से भी निकल दिया जाएगा।" आदेश में न तो यह लिखा था कि आदेश किस के बारे सर्वेक्षण किया जाना है? और न यह लिखा था के आदेश कहां के लिए है? यह व्यक्तिगत आदेश दिनांक 18-02-2013 को जारी किया गया था जो कि दिनेश उपाध्याय के लिए था। जिस पर नगर पालिका के आला अधिकारी के भी हस्ताक्षर थे।

उल्लेखनीय है कि जनसंख्या ,गरीबी से नीचे रहने वालों का सर्वेक्षण, वोटर कार्ड, राशन कार्ड आदि के सर्वेक्षण समाप्त हो चुके हैं। इस फर्जीवाड़े की जानकरी जब सिहोर नगर के वार्ड नंबर 32 के पार्षद श्री आज़म बेग को दी गयी तो वार्ड के पार्षद का कहना था कि "यह मेरा आदेश है और यह मेरा वार्ड है, वार्ड में रहने वालों को इस पर हस्ताक्षर करना ही होगा।" तुम अपनी नोट बुक में नगर पालिका कर्मचारी का नाम नहीं लिख सकते हो और कहते हुए उन्‍होंने नोट बुक का पन्ना फाड दिया। पत्रकार से नोट बुक छीन कर गंदी नाली में फेंक दिया। पत्रकार आमिर खान से अपशब्द बोलने लगे।

इसके बावजूद आमिर खान द्वारा बार बार कहा गया कि आप मुझे से जो चाहे अपशब्द कहें लेकिन कृपया राज्य प्रतीक की गरिमा का ख्याल करें, यह हमारे राज्य प्रतीक है जिस में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री जी और व कई महत्वपूर्ण भी जानकारी लिखी है, जो कि जनता के लिए महत्वपूर्ण कृपया उन का ख्याल रखे। लेकिन अनुरोध करने पर भी पार्षद ने एक न सुनी और राज्य प्रतीक छापी नोट बुक व मुख्यमंत्री जी से संबंधित जानकारी वाली नोट बुक को गन्दी नाली में फेंक दिया। पार्षद अपने घमंड में इतना चूर था कि राज्य प्रतीक तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री जी के नाम तक का ख्याल नहीं रखा।

उल्लेखनीय है के पत्रकार आमिर खान की उस नोट बुक में मुख्यमंत्री श्री शिव राज सिंह चौहान जी के सचिव फ़ोन नंबर, ई मेल एड्रेस, उत्तराखंड के राजपाल के सचिव फ़ोन नंबर, ई मेल एड्रेस राज्य में और देश में शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में लिखा था, जिस का लाभ देश और राज्य की जनता को मिल रहा है। इसमें कई महत्वपूर्ण जानकारी लिखी थी जो के नोट बुक को गंदे नाली के पानी में फेंक ने से नष्ट हो गई। साथ ही पार्षद द्वारा फेकी गयी नोट बुक के ऊपर राज्य प्रतीक भी बना था, जिस को नाली में फेकते समय पार्षद आज़म बेग को राज्य प्रतीक की गरिमा का बिलकुल भी ख्याल नहीं रहा। उस नोट बुक की हर पृष्ठ राज्य प्रतीक छापा हुआ था। इस तरह राज्य प्रतीक को गंदे नाली के पानी में फेंकने का हक एक निर्दलीय पार्षद को किस ने दिया?

कुछ सवाल?

अब सवाल यह पैदा होता है क्या? क्या देश में किसी जागरूक नागरिक को जानकारी लेने का हक नहीं है? और अगर आदेश किसी अधिकारी द्वारा जारी किया गया था तो उस की जानकारी कर्मचारी को क्यों नहीं है? जिस की जानकारी वो नागरिको को दे सके? जब किसी सर्वेक्षण के आदेश की डेट लाइन 20-02-2013 है तो मार्च 23 तक किस बात का और क्यों सर्वेक्षण किया जा रहा था? क्या नगर पालिका सिहोर के कर्मचारी अपना काम करने में सक्षम नहीं हैं? या किसी घोटाले को अंजाम देने के लिए नगर पालिका कर्मचारी और वार्ड के पार्षद कोई सर्वेक्षण करवा रहे हैं? या फिर पत्रकार की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है?

उल्लेखनीय है कि सिहोर जिले में पत्रकारों पर दुर्व्यवहार का बीते एक साल में यह छठा मामला है. बीते एक साल में सिहोर फोटो पत्रकार श्री बब्बल गुरु, श्री संतोष कुशवाहा, श्री गौतम शाह आदि से दुर्व्यवहार के मामले सामने आए हैं तो वहीं पत्रकारों पर खबर को न छापने, दिखाने का दबाब पर भी डाला जाता है। पत्रकारों पर गलत आरोप भी लगाए जाते हैं। वहीं सिहोर तहसील आष्टा में भी हाल ही में एक भी पत्रकार से दुर्व्यवहार का मामला सामने आया था, जिस की शिकायत जिला पत्रकार संघ इकाई ने जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर की थी। इसके बाद  सख्त कार्रवाई भी हुई थी। इसी तरह विदिशा जिले की तहसील सिरोंज से भी हल ही में एक पत्रकार से दुर्व्यवहार का मामला सामने आया था, जिस के विरुद्ध सिरोंज पत्रकार संघ ने एक दिन का आन्दोलन कर शहर में अख़बार नहीं बंटने दिया था। और उस की शिकायत मध्य प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री से की थी।

क्या इस खबर के छपने के बाद मध्य प्रदेश पत्रकार संघ और सिहोर संघ भी सिरोंज पत्रकार संघ की तर्ज़ पर कोई आन्दोलन करेगा? क्या शासन और प्रशासन इस तरह के फर्जी सर्वेक्षण की रोक पर कोई सख्त कदम उठाएगा? क्या राज्य प्रतीक को गन्दी नाली में फेंक ने वालों पर कोई कार्रवाई होगी? जिन को राज्य प्रतीक की गरिमा का कोई ख्याल नहीं है? क्या शासन पत्रकारों से दुर्व्यवहार करने वालों पर कोई सख्त कार्रवाई करेगा? क्या शासन और प्रशासन पत्रकारों को सुरक्षा के लिए कोई कदम उठाएगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा? लेकिन यह बात समझ से परे नहीं कि जहां राज्य के मुखिया के जिले गृहनगर में पत्रकारों की यह हालत है, तो पूरे राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा अंदाज़ा लगाना कठिन नहीं होगा? 

पत्रकार ए खान की रिपोर्ट.

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