राजस्थान पत्रकार संघ ने हनुमानगढ़ के पत्रकार लोकेश वर्मा की मौत की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। जांच में हो रही कोताही के चलते राजस्थान पत्रकार संघ की टीम ने प्रदेश अध्यक्ष उमेंद्र दधीच के निर्देशानुसार अपनी जांच आयोजित की और इस मौत को संदेहास्पद पाया है। ग़ौरतलब है कि हनुमानगढ़ के समाचार पत्र लोकेश केसरी के मालिक लोकेश वर्मा की पिछले दिनों हनुमानगढ़ से संगरिया जाते वक्त सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गयी थी। स्थानीय लोगों का मानना है कि ये सड़क दुर्घटना जान-बूझ कर करवायी गयी थी।
दुर्घटना में मारे गये पत्रकार लोकेश वर्मा के पुत्र पंकज ने अपने पिता के पूर्व प्रकाशित लेखों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने अपने समाचार पत्र में स्थानीय राजनेता के भ्रष्टाचार संबंधी कई राज खोले थे। पंकज के मुताबिक राजनेता और कुछ माफिया तत्वों ने उनके पिता को कई बार धमकियां दी थीं, लेकिन उन्होंने इसके बावज़ूद अपना अभियान नहीं छोड़ा। उन्होंने इन धमकियों के बारे में स्थानीय प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति तक को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन किसी ने उनकी सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया।
लोकेश वर्मा की मौत की जांच करने वाले पत्रकारों में संघ के बीकानेर प्रभारी मधुप वशिष्ठ, सुभाष अग्रवाल और तीन अन्य पत्रकार शामिल थे। उन्होंने जांच में पाया कि स्थानीय राजनेता और कुछ माफिया तत्वों ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी गोल-मोल भाषा में लिखी गयी है जिससे किसी साज़िश का संदेह और पक्का हो जाता है। संघ की मांग है कि सरकार इस मामले को अति शीघ्र सीबीआई को सौंपे वर्ना माफिया तत्व सुबूतों को मिटाने में कामयाब हो जाएंगे।