टीआरपी यानी टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट को लेकर लंबे समय से विवाद होता चला आ रहा है. टीआरपी रेटिंग एक बार फिर विवादों में घिर गई है. कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने रेटिंग जारी करने वाली संस्था टैम मीडिया रिसर्च से टीआरपी वाला इनवेस्टीगेटिंग रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया है. यह आदेश प्रसार भारती द्वारा दूरदर्शन न्यूज चैनल को मिली गलत रेटिंग की एक याचिका दाखिल किए जाने के बाद आया है.
प्रसार भारती का कहना है कि टैम अपने रिसर्च एकाधिकार का इस्तेमाल करते हुए गलत सूचनाएं देता है. इसकी वजह से दूरदर्शन के कवरेज की सही रेटिंग नहीं आती है. प्रसार भारती ने सितम्बर 2012 में यह याचिका दायर की थी, जिसके बाद सीसीआई ने टैम को यह आदेश सुनाया है. टैम को दो महीने में रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है. प्रसार भारती लंबे समय से आरोप लगाता आया है कि टैम सही तरीके से रेटिंग नहीं करता है. यह बात कई बार सही भी साबित हुई है.
माना जा रहा है कि टैम जब सीसीआई के सामने जब अपने रिसर्च आंकड़े दाखिल करेगा तो इस तंत्र की सच्चाई सबके सामने आ जाएगी. हालांकि लंबे समय तक टैम पर आरोप लगते रहे हैं कि यह रेटिंग एजेंसी सहीं आंकड़े प्रस्तुत नहीं करती है. देश में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला दूरदर्शन कभी भी इस टीआरपी में टॉप पर नहीं रहा, जबकि यह सबसे ज्यादा दर्शकों तक पहुंच रखता है. एनडीटीवी भी टैम मीडिया पर आरोप लगा चुका है.
इधर, टैम का कहना है कि हम ग्रामीण इलाकों में भी जाने के लिए तैयार हैं. इसके लिए हमले दूरदर्शन को प्रस्ताव भी भेजा है लकिन डीडी हमें फंड मुहैया कराने के लिए तैयार नहीं है. टैम ने कभी भी भारत की कुल जनसंख्या 1.2 बिलियन लोगों को कवर करने का दावा नहीं किया है. अगर पूरी इंडस्ट्री और दूरदर्शन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए फंड मुहैया कराती है तो हम वहां जायेंगे.






