: बिना एसपी के अनुमोदन के अधीनस्थ नहीं देंगे पत्रकारों को जानकारी : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर में मीडिया पर पाबंदी लगाने की कुत्सित कोशिशें शुरू कर दी गई हैं. यहां के पत्रकारों तथा पत्रकारिता पर नौकरशाही हावी होकर सेंसर लगाने का प्रयास शुरू कर दिया गया है. इसी महीने कई थाना कोतवालियों में पुलिस ने अनुभागीय अधिकारी योगेश्वर शर्मा के हस्ताक्षर वाला पत्र चस्पा कर दिया है, जिसमें लिखा गया है कि पुलिस कप्तान के अनुमोदन के बाद ही पत्रकारों को कोई जानकारी दी जाए.
यह घटना बताता है कि प्रशासन और पत्रकारों के बीच संबंध किस स्तर तक पहुंच चुके हैं. राज्य के संवेदनशील जिले में शुमार सीहोर में इंटेलीजेंट पत्रकारों की कमी नहीं है, लेकिन दोयम दर्जे का काम करके दिन रात पुलिस को सैल्यूट करने वाले कुछ पत्रकारों के चलते पूरी बिरादरी पर पुलिस ने सेंसरशिप लागू कर दी है. यह पत्रकारों के साथ इस तरह के व्यवहार का पहला उदाहरण नहीं है. इसके पहले भी एक पत्रकार का संस्थान पुलिस-प्रशासन के निशाने पर आ चुका है. एक जिलाबदर के मामले में प्रशासन ने अवमानना का नोटिस थमा दिया था.
यहां की पत्रकारिता की अपनी अलग पहचान थी, पर कुछ नए पत्रकारों तथा हल्के पत्रकारों की इंट्री ने पूरे माहौल को खराब कर दिया है. हालांकि रिजर्व तरीके से बात करने वाले पत्रकारों की इमेज प्रशासन में अब भी अचछी है, लेकिन पुलिस-प्रशासन से लगातार मिल रही दुत्कार के बाद प्रेस कब तक अकेला चलकर अपना सयंम काम रख सकेगा. साथ ही अभी यह भी देखना है कि सीहोर में प्रेस को नीचा दिखाने का सिलसिला अधिकारी कब तक जारी रखते हैं. तथा कब तक योगेश्वर शर्मा जैसे अधिकारी प्रेस की स्वतंत्रता को चुनौती देते हैं.

संध्या प्रकाश
सीहोर





