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सी न्‍यूज में कर्मचारियों का टोटा, नहीं मिलता है वीकली ऑफ

आगरा से संचालित होने वाले सी न्यूज में हालात अच्छे नहीं बताए जा रहे हैं। इस चैनल में कर्मचारियों के चैनल छोड़ने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। कुछ कर्मचारी पहले ही ग्वालियर का रूख कर चुके हैं जबकि कुछ दिल्ली के चैनलों में जुडे हैं। चैनल प्रबंधन ने सैलरी इंक्रीमेंट के बहाने कुछ लोगों को रोककर जैसे तैसे काम चला रखा है, लेकिन ये लोग भी इस चैनल में तब तक ही काम कर रहे हैं जब तक की इनके पास कोई अच्छी नौकरी हाथ नहीं आती है।

आगरा से संचालित होने वाले सी न्यूज में हालात अच्छे नहीं बताए जा रहे हैं। इस चैनल में कर्मचारियों के चैनल छोड़ने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। कुछ कर्मचारी पहले ही ग्वालियर का रूख कर चुके हैं जबकि कुछ दिल्ली के चैनलों में जुडे हैं। चैनल प्रबंधन ने सैलरी इंक्रीमेंट के बहाने कुछ लोगों को रोककर जैसे तैसे काम चला रखा है, लेकिन ये लोग भी इस चैनल में तब तक ही काम कर रहे हैं जब तक की इनके पास कोई अच्छी नौकरी हाथ नहीं आती है।

खबर है कि चैनल के एडिटोरियल, एडिटिंग, पीसीआर और आईटी तक के लोग अपने संबंधों के जरिए लगातार दिल्ली और दूसरी जगह पर मीडिया जगत के दूसरे लोगों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। इन लोगों को जैसे ही कोई दूसरा विकल्प मिलता है तो फौरन नौकरी से बाय बाय कर देंगे। इन हालात में सी न्यूज निश्चित तौर पर संकट में घिर सकता है। कर्मचारियों की परेशानी इस बात को लेकर है कि जब से उन्होंने चैनल ज्वाइन किया है सैलरी इंक्रीमेंट नहीं हुआ है। महज कुछ एक लोगों को छोड दें तो किसी की सैलरी में इकन्नी भर भी इजाफा नहीं किया गया है। साथ ही इस चैनल में विकली ऑफ का भी कोई सीन नजर नहीं आता है।

चैनल के कर्ताधर्ताओं का कहना है कि वीकली ऑफ नहीं मिलेगी, हां जरूरत हो तो वैसे ही छुट्टी ले सकते हो। जाहिर है इन हालात में वही काम कर सकता है जो बेरोजगार नहीं होना चाहता है। सी न्यूज का इतिहास वैसे ज्यादा पुराना नहीं है। यूपी और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2012 के दौरान इस चैनल की शुरुआत की गई थी। उस दौरान लोगों को मोटी सैलरी पर बुलाया गया था लेकिन कुछ ही महीने बाद इस चैनल से लोगों के जाने का सिलसिला शुरू हो गया। अब चैनल प्रबंधन की कोशिश है कि सी न्यूज को किसी तरह से लोकसभा चुनाव 2014 तक चलाया जाए ताकि उस दौरान कुछ कमाई हो सके। वैसे चैनल की पॉलिसी भी सही है कि लोकसभा चुनाव के दौरान हर रीजनल चैनल को विज्ञापन के रूप में मोटी कमाई होगी भी, क्योंकि इस चुनाव में इस बार यूपीए और एनडीए में कांटे की टक्कर होने की पूरी उम्मीद की जा रही है। इसी बात का फायदा तमाम चैनल उठाने की तैयारी कर रहे हैं।

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