नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सहारा समूह की कंपनियों को जनता का निवेश सुनिश्चित करने के लिए ओएफसीडी योजना के तहत छोटे निवेशकों द्वारा वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (ओएफसीडी) योजना में जमा धन की सुरक्षा के मद्देनजर पर्याप्त बैंक गारंटी या 'पृथक अचल संपत्ति' सौंपने के लिए तीन हफ्तों का समय दिया है। मुख्य न्यायाधीश एस एच कपाडिय़ा की अगुआई वाले पीठ ने कहा कि सहारा समूह की दोनों कंपनियों और सेबी को मिलकर यह पक्का करना होगा कि निवेशकों को ओएफसीडी योजना में लगी उनकी रकम का नुकसान नहीं हो।
एक औपचारिक आदेश तीन हफ्तों में जारी किया जाएगा। जहां उच्चतम न्यायालय ने प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) के सहारा समूह की कंपनियों को निवेशकों को 17,400 करोड़ रुपये लौटाने के आदेश पर स्थगनादेश दे दिया, वहीं निवेशकों के हितों की रक्षा के प्रति चिंता प्रकट की है। सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ने सैट के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय की शरण ली है।
सहारा समूह के वकील एफ एस नरीमन ने कहा कि अदालत के पूर्व के आदेश के क्रम में कंपनियों के मूल्यांकन का काम पूरा कर लिया गया है। कंपनियों की संपत्ति की संभावित देनदारियों को पूरा कर लिया है। सेबी की हर पूछताछ का जवाब दे दिया गया है। वकील ने कहा कि किसी भी निवेशक की तरफ से शिकायत नहीं मिली थी। साभार : बीएस






