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सुब्रत रॉय और विजय माल्या की एक जैसी कहानी

सहारा और इससे पहले किंगफिशर – ये दोनों ऐसे ग्रुप हैं जो अपने प्रमोटर की शख्सियत की वजह से चर्चा में रहे हैं। और अब जब वो फंसे हैं तो सवाल उनके बिजनेस के तौर तरीके को लेकर उठ रहे हैं। तरीके उनके भले अलग हों – लेकिन विजया माल्या और सुब्रत राय सहारा के राइज और फॉल की कहानी एक जैसी है। दोनों में कारोबारी रिश्ते भी हैं। एफ 1 रेस में फोर्स वन टीम में दोनों पार्टनर हैं।

सहारा और इससे पहले किंगफिशर – ये दोनों ऐसे ग्रुप हैं जो अपने प्रमोटर की शख्सियत की वजह से चर्चा में रहे हैं। और अब जब वो फंसे हैं तो सवाल उनके बिजनेस के तौर तरीके को लेकर उठ रहे हैं। तरीके उनके भले अलग हों – लेकिन विजया माल्या और सुब्रत राय सहारा के राइज और फॉल की कहानी एक जैसी है। दोनों में कारोबारी रिश्ते भी हैं। एफ 1 रेस में फोर्स वन टीम में दोनों पार्टनर हैं।

1978 में सुब्रत राय ने सहारा ग्रुप की शुरुआत की थी और 1983 में विजय माल्या ने भी यूबी ग्रुप की कमान संभाली थी। इन दोनों की लाइफस्टाइल और कारोबार में भी कई समानताएं हैं। विजय माल्या और सुब्रत रॉय सहारा का बुरा दौर शुरु हो गया है- मौजूदा हालात तो यही कहते हैं। स्पोटर्स, एविएशन और होटल कारोबार में दोनों की खासी दिलचस्पी है लेकिन मेन बिजनेस दोनों का अलग है। सहारा ग्रुप ने जहां एनबीएफसी के कारोबार से दौलत हासिल की तो विजया माल्या ने लिकर किंग बनकर दिखाया।

जिस एनबीएफसी कारोबार के दम पर सुब्रत रॉय सहारा ने अपना साम्राज्य खड़ा किया था वही कारोबार अब सहारा ग्रुप के लिए सबसे बड़ी लायबिलिटी बन गया है। सेबी ने सहारा से 24,000 करोड़ रुपये की वसूली के लिए प्रॉपर्टी जब्त करने और खाते सील करने का फरमान सुना दिया है। एक अनुमान के मुताबिक सहारा ग्रुप का कारोबार 5,000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा का है। कंपनी फाइनेंस, मीडिया, हाउसिंग और रिटेल सहित दूसरे कारोबार में है, कंपनी ने एविएशन में भी हाथ आजमाया था लेकिन भारी नुकसान के बाद उसे बेच दिया। अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या सेबी 24,000 करोड़ रुपये की वसूली कर पाएगा? और सहारा ग्रुप का क्या होगा?

किंगफिशर कैलेंडर से सुर्खियों में रहने वाले विजय माल्या भी भारी मुसीबत में हैं, घर तक बिकने की नौबत आ चुकी है। मामला किंगफिशर एयरलाइंस के डूबने का है। किंगफिशर एयरलाइंस पर 7,000 करोड़ का कर्ज है और बैंकों ने वसूली के लिए अल्टीमेटम दे दिया है। विजय माल्या के पास शायद अब कोई रास्ता नहीं बचा है। किंगफिशर की उड़ान तो लगभग असंभव है अब खतरा यूबी ग्रुप की दूसरी कंपनियों के बिकने तक का है। ग्रुप कंपनियों के शेयर भी बैंकों के पास गिरवी हैं। बैंक अब उन्हें बेचने की तैयारी कर रहे हैं। इस सब के बावजूद भी बैंक कितना कर्ज वसूल पाएंगे, इस पर खुद बैंकों को भी पता नहीं है

दोनों बिजनेस लीडर की कहानी को देखें तो यही लगता है कि ये बिजनेस के मूल सिद्धांत से कहीं भटक गए। इनके शाही शानों शौकत की चर्चा ने लोगों के बीच भी ऐसी छवि बना दी है जहां इनके बिजनेस के डूबने पर भी अफसोस कम है, आलोचना ज्यादा। सबक क्या है- यही कि हलके में बिजनेस नहीं चलता।

(स्रोत: सीएनबीसी आवाज)

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