लखनऊ। पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अलग से कानून बनाये जाने की मांग को लेकर राजधानी के पत्रकार आज विधान भवन के सामने धरने पर बैठे। धरने में भारी संख्या में पत्रकार, छायाकार और मीडियाकर्मी शामिल हुए। धरने का आयोजन नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स (इण्डिया) की राज्य शाखा उ.प्र. जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) ने किया। धरने को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश भर में पत्रकारों की सुरक्षा खतरे में है। पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने की परिस्थितियां दिन प्रतिदिन विषम होती जा रही हैं।
वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं। उन्हें धमकियां दी जा रहीं। देश के कई हिस्सों में पत्रकारों को अपने काम के दौरान जान गंवानी पड़ी है। पत्रकारिता के जोखिम भरे क्षेत्र को दृष्टिगत रखते हुए पत्रकारों की सुरक्षा के लिए एक विशेष कानून बनाया जाना चाहिए। यह कानून पत्रकारों पर हो रहे हमलों तथा उनकी जानमान की सुरक्षा कर सकेगा। वक्ताओं ने धरने पर बताया कि एनयूजे की ओर से पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर दो साल से आन्दोलन चलाया जा रहा है। इसके लिए एनयूजे और उसकी राज्य इकाइयां अपने अधिवेशनों तथा सम्मेलनों में प्रस्ताव पारित कर चुकी हैं। पिछले साल भी 25 जून को देश व्यापी धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया था।
धरने पर वरिष्ठ पत्रकार सत्येन्द्र शुक्ला, पी.के.राय, पी.बी.वर्मा, अजय कुमार, प्रमोद गोस्वामी, राजीव शुक्ला, सर्वेश कुमार सिंह, सुभाष सिंह, सत्येन्द्र अवस्थी, किशन सेठ, सुनील पावगी, तारकेश्वर मिश्र, प्रभात त्रिपाठी, रजा रिजवी, दिलीप अग्निहोत्री, रवीन्द्र शुक्ला, अशोक मिश्र, भारत सिंह, राजेश सिंह, सुशील सहाय, सुनील त्रिवेदी समेत भारी संख्या में पत्रकार बैठे। धरने के बाद पत्रकारों ने महामहिम राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन राजभवन जाकर प्रमुख सचिव राज्यपाल जी.बी. पटनायक को भेंट किया। ज्ञापन में मांग की गई है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए केन्द्र सरकार संसद से अधिनियम बनाकर विशष कानून बनाये।





