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सुशासन में और निरंकुश हुई पुलिस, दर्ज किया फर्जी एफआईआर

आदरणीय, यशवंत जी, भड़ास मीडिया, नमस्कार। आपका, मुझसे मेरी समस्याओं का पूछना ही डुबते को तिनके का सहारा प्रतीत हुआ, इसके लिए कोटि-कोटि धन्यवाद। मैंने, भूमि अतिक्रमण किये जाने पर, दबंगों की गुण्डागर्दी के खिलाफ माननीय मुख्यमंत्री बिहार, डीजीपी बिहार, एसपी भोजपुर, बिहार एवं नगर थाना आरा को आवेदन दिनांक 23/03/2013 को निबंधित डाक से प्रेषित किया। इसके पश्चात कोई कारवाई होता न देख दिनांक 05/04/13, 06/04/13, 08/04/13, 09/04/13 को भी थाना एवं एसपी भोजपुर को आवेदन प्रेषित किया। इसके बाद मैं 09/04/13 को मैं भुरकुण्डा, झारखण्ड चला आया। मेरे अनुपस्थिति में ही मेरे नाम पर मारपीट के आरोप लगाते हुए नगर थाना आरा में एफ आई आर दर्ज किया गया वह भी बिना जाँचे और समझे।

आदरणीय, यशवंत जी, भड़ास मीडिया, नमस्कार। आपका, मुझसे मेरी समस्याओं का पूछना ही डुबते को तिनके का सहारा प्रतीत हुआ, इसके लिए कोटि-कोटि धन्यवाद। मैंने, भूमि अतिक्रमण किये जाने पर, दबंगों की गुण्डागर्दी के खिलाफ माननीय मुख्यमंत्री बिहार, डीजीपी बिहार, एसपी भोजपुर, बिहार एवं नगर थाना आरा को आवेदन दिनांक 23/03/2013 को निबंधित डाक से प्रेषित किया। इसके पश्चात कोई कारवाई होता न देख दिनांक 05/04/13, 06/04/13, 08/04/13, 09/04/13 को भी थाना एवं एसपी भोजपुर को आवेदन प्रेषित किया। इसके बाद मैं 09/04/13 को मैं भुरकुण्डा, झारखण्ड चला आया। मेरे अनुपस्थिति में ही मेरे नाम पर मारपीट के आरोप लगाते हुए नगर थाना आरा में एफ आई आर दर्ज किया गया वह भी बिना जाँचे और समझे।

सुशासन में यह बात मुझे खटक गई कि मेरे 20 दिन पूर्व के आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है और किसी अन्य के आवेदन देने पर Same date and time पर मेरे खिलाफ झूठा एफआईआर दर्ज कर दिया जाता है। चूंकि मेरे 20 दिनों पूर्व के दिये गये आवेदन पर सरकार द्वारा विधिसम्मत कार्रवाई की जाती तो मारपीट की घटना ही न घटती, न ही मुझ पर झूठा एफआईआर होता और न ही माननीय न्यायालयों पर बोझ बढ़ता! यह सरासर कर्तव्यहीनता का परिणाम था, जिसके कारण मैंने सूचनाधिकार अधिनियम के माध्यम से कर्तव्यहीन अधिकारियों के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी, जिससे घबराकर भोजपुर पुलिस द्वारा मुझे दोषमुक्त कर दिया गया। यह बात अलग है कि मुझे आजतक सूचनाधिकार अधिनियम के अन्तर्गत किसी प्रकार की सूचना न दी गई।

इस कर्तव्यहीनता के खिलाफ मैंने सरकार से कर्तव्यहीन अधिकारियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कर जाँच की मांग की है। जब एक आम आदमी पर एफआईआर दर्ज हो सकता है तो कर्तव्यहीन अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर जाँच क्यों नहीं की जा सकती! क्या भारतीय कानून समान रूप से कार्य नहीं करेगा?

परिणामस्वरूप आज स्थिति यह है कर्तव्यहीन अधिकारियों के सहयोग से ही मेरे वैध जमीन पर अवैध कब्जा करवाया जा रहा है। इससे संबंधित सारे कागजात डीएम, भोजपुर एवं एसपी, भोजपुर को आवेदन के माध्यम से दिनांक 22/04/13 को ही ई-मेल एवं फैक्स के माध्यम से प्रेषित किये जा चुके थे। भोजपुर पुलिस मेरे द्वारा सूचनाधिकार के उपयोग के कारण बिलकुल ही चिढ़ गई है तथा कभी भी मुझ पर झूठा एफआईआर या जानलेवा हमला करा सकती है। जिसका प्रमाण नगर थाना आरा के एक अधिकारी से फोन पर बात करने के दौरान सामने आया। इस पुलिस अधिकारी द्वारा साफ-साफ कहा गया कि तुम कायर हो और हम तुम्हारे आवेदनों पर कार्य नहीं करेंगे। सामने आओ तब ही कुछ करेंगे।

अतः भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ाई में आपका सहयोग अपेक्षित है।

धन्यवाद!        

पीड़ित

प्रमोद कुमार सिंह

आर टी आई कार्यकर्ता
गौसगंज, आरा, बिहार

वर्तमान पताः-
भुरकुण्डा, रामगढ़, झारखण्ड।
मो0-09431986774
[email protected]

दिनांकः-12/05/2013

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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