Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

सूचना अधिकारी भी पत्रकार बन कर भूखंड के लिए किया आवेदन

झुंझुनू: वैसे तो फर्जीवाड़ा व धांधली में झुन्झुनू प्रदेशभर में खूब बहुचर्चित है। लेकिन हद तो उस समय हो गई जब एक सरकारी अधिकारी भी पत्रकार बनकर सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिये नगर परिषद में आवेदन तक कर डाला तथा भूखण्ड हथियाने के लिये अपने पद का भी भरपूर उपयोग करते हुए दबाव बनाने व चंद पत्रकारों के नाम जिला कलेक्टर के पास भिजवाने की सिफारिश तक कर डाली।

झुंझुनू: वैसे तो फर्जीवाड़ा व धांधली में झुन्झुनू प्रदेशभर में खूब बहुचर्चित है। लेकिन हद तो उस समय हो गई जब एक सरकारी अधिकारी भी पत्रकार बनकर सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिये नगर परिषद में आवेदन तक कर डाला तथा भूखण्ड हथियाने के लिये अपने पद का भी भरपूर उपयोग करते हुए दबाव बनाने व चंद पत्रकारों के नाम जिला कलेक्टर के पास भिजवाने की सिफारिश तक कर डाली।

गौरतलब है कि वर्ष 2003 में झुन्झुनू नगर परिषद ने पत्रकारों को पं. दीनदयाल नगर आवासीय योजना में भूखण्ड देने के लिये आवेदन पत्र मांगे थे। उसके बाद भी समय-समय पर आवेदन मांगे जाते रहे तथा पांच हजार रुपये के साथ ही नगर परिषद में जमा आवेदन पत्रों की कुल संख्या अब तक 57 रही है। जिनमें अधिकांश आवेदनकर्ता तथाकथित रूप से फर्जी है। अधिकांश लोगो का पत्रकारिता से कोई संबध नही है। कुछ तो अखबार के हाकर या फिर किसी अखबार वितरक एजेंसी के एजेंट हैं या अखबार की एजेंसी चलाने वाले हैं। उन्होंने भी पत्रकार होने का दावा ठोंक दिया। अधिकांशल लोगों के पास किसी अखबार के अधिकृत कर्मचारी होने का कोई ठोस सबूत नहीं है। फिर भी वो पत्रकार होकर सरकारी योजना पर दिनदहाड़े डाका डालने में जुट गये हैं। इन तथाकथित लोगों को संरक्षण देने में झुन्झुनू का सरकारी दफ्तर सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय पूर्ण रूप से जिम्मेदार है। हद तो उस समय हो गई जब सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी ने भी पत्रकार की तरह सरकारी पद पर होते हुए भी प्लाट लेने के लिये आवेदन तक कर डाला।

मजे की बात तो यह है कि कुछ लोग विज्ञापन एजेंसी में काम करने वालों ने भी सरकारी भूमि में प्लाट लेने के लिये पत्रकारों की लाईन में खड़े होकर आवेदन कर डाला। दूसरे जिले के लोगों ने भी यहां आवेदन कर डाले। नगर परिषद में पत्रकारों के 57 आवेदन पत्रों पर नजर डाली जाये तो सभी दंग रह जायेंगे। ऐसे-ऐसे लोगों ने आवेदन कर डाला जो कि पत्रकारिता से उनका कोई किसी प्रकार का संबध तक नहीं रहा है। दिनांक 30 जून 2011 तक 57 आवेदन पत्र नगर परिषद को मिल चुके थे। यह सभी लोग पत्रकार होने का दावा कर रहे हैं। जबकि अधिकांश लोग फर्जी हैं तथा फर्जीवाड़े के तहत ही आवेदन किये हैं। नगरपरिषद के अनुसार क्र.सं. 1 से 32 तक आवेदन पत्रों में से 2 आवेदक ही अधिस्वीकृत पत्रकार होने के कारण भूखंड आवंटन के पात्र थे। परंतु क्र .सं. 1 पर अंकित श्यामसुंदर पोद्दार को परिषद की इंदिरा नगर योजना में एच-37 भूखंड आवंटन होने के कारण पात्रता समाप्त हो गई एवं क्रमांक संख्या 9 पर अंकित उमेश सहल अधिस्वीकृत पत्रकार होने के कारण परिषद द्वारा जरिये लाटरी भूखण्ड आवंटन किया जा चुका है। क्रमांक 17 पर अंकित ओमप्रकाश शर्मा लक्ष्मणगढ ने अपनी जमा अमानत राशि वापस प्राप्त कर ली। अत: पूर्व में 32 आवेदनों में से तीन आवेदन पत्रों का निस्तारण हो गया। जबकि शेष 29 आवेदन पत्र वर्ष 2003 से नगर परिषद में पड़े धूल चाट रहे है।
गत 30 जून 2011 तक मांगे गये आवेदन पत्रों के अनुसरण में 25 आवेदन पत्र नगर परिषद को पत्रकारों के प्राप्त हुए। इन पत्रकारों के अधिस्वीकृत होने की जानकारी सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी से नगरपरिषद ने कई बार मांगी लेकिन अधिकारी ने आज तक नगर परिषद को कोई जानकारी नही दी है। सूचना जनसंपर्क अधिकारी की कार्यशैली संदिग्ध बनी हुई है, जिसके चलते ही फर्जी पत्रकारों की बाढ़ आई हुई है। भारी फर्जीवाड़ा व इस धांधली की उच्चस्तरीय जांच करवाने के लिये झुन्झुनू संपादक संघ के अध्यक्ष सूरज प्रकाश पुरोहित, राष्ट्रीय जर्नलिस्ट एसोसियेशन के झुन्झुनू जिलाध्यक्ष ओम स्वामी ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस धांधली की उच्चस्तरीय जांच कराने व फर्जी व तथाकथित पत्रकारों के आवेदन पत्रों को निरस्त करने व सही योग्य पत्रकारों को ही लाभ इस योजना में देने की मांग की गई है।

कुछ तथाकथित स्वार्थी लोग पत्रकारिता की आड़ लेकर प्रशासन को गुमराह कर अपने स्वार्थ की रोटियां सेंकना चाहते है, जो कि गंभीर जांच का विषय है। जो पत्रकार नियम कानून कायदे से बने हुए है उनको नजरअंदाज कर ऐसे लोग इस क्षेत्र में घुसे हैं जिनका पत्रकारिता कोई जीविका का आधार नहीं है। वे श्रमजीवी पत्रकार की श्रेणी में नहीं आते हैं, उनको भी सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी ने तथाकथित रूप से संरक्षण देकर अपने पद व मर्यादा का उल्लंघन कर रहे हैं। अधिकांश तथाकथित पत्रकारों के पास उनकी संस्थान की नियुक्ति पत्र, आईकार्ड, वेतन उठाने जैसे कोई ठोस सबूत नहीं है। फिर भी उनको पत्रकार बताते हुए सूचना एवं जनंसपर्क अधिकारी उनकी पैरवी कर रहे हैं। सरकारी पद पर बैठा अधिकारी श्रमजीवी पत्रकार बनकर कैसे लाभ उठाने का पात्र हो सकता है। कौन से नियमों के तहत अधिकारी ने पत्रकार होने का बीस वर्ष का अनुभव होने का दावा ठोंक दिया। ऐसे अनेक सवाल अधिकारी की कार्यशैली पर खड़े हो रहे है।

ठोस सूत्र बताते है कि विभाग की कई ऐसी फाइल है जिनको खंगालने पर भारी धांधली पलभर में उजागर हो जायेगी। जब-जब यह अधिकारी यहां रहा है तब-तब धांधली की पोल भी यहां खुली है। सरकारी योजनाओं की जानकारी कोई यहां लेने आता है तो अधिकारी उसे टरका देता है। यहां तथाकथित संदिग्ध लोग सरकार की खिलाफत व राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारी यहां बैठकर खुलेआम सरकार विरोधी नीतियां बनाते देखे जा सकते हैं, जो कि एक गंभीर जांच का विषय है। ऐसे तथाकथित लोगों की प्रेस विज्ञप्ति कई बार यहां से जारी होती है। गौरतलब है कि तत्कालीन जिला कलेक्टर सुधांश पंत, भवानी सिंह देथा ने कई बार इस अधिकारी को लताड़ पिलाई व कई नोटिस भी थमाए थे। यह सूचना केन्द्र राजनीतिक गतिविधियों का अड्डा बना हुआ है। प्रेस नोट समय पर जारी नहीं होते हैं। मीडिया के दफ्तरों में पहुंचाया नहीं जा रहा है। पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से भेंट कर इस फर्जीवाड़े की जांच की मांग करेगा वहीं इस फर्जीवाड़े के खिलाफ सक्षम न्यायालय में वाद भी दायर किया जायेगा।

एक पत्रकार द्वारा भेजा गया पत्र.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...