दैनिक जागरण में कुछ भी संभव है. यह एक ऐसा अखबार है जो कुछ भी कर करा सकता है. मायावती के खिलाफ बेहद घटिया और जातिसूचक हेडिंग लगाने के कारण मायावती के कोप के शिकार होने के बावजूद जागरण के गुप्ताज को अकल नहीं आई. इनके यहां अब सोनिया गांधी के खिलाफ बेहद अश्लील मैटर प्रकाशित हो गया है.
कांग्रेस के लोगों का पारा गरम है. पटना एडिशन में हुए इस कुकृत्य के खिलाफ कांग्रेसियों ने प्रदर्शन भी किया जिसका नेतृत्व आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव और बिहार प्रभारी गुलचैन सिंह चारक ने किया. जागरण प्रबंधन ने गल्ती मानते हुए स्थानीय संपादक की तरफ से एक माफीनामा पहले पन्ने पर प्रकाशित करा दिया.
कायदे से सोनिया गांधी और उनके पुत्र व पुत्री के खिलाफ अश्लील पत्र दैनिक जागरण में प्रकाशित होने के बाद जागरण प्रबंधन को अपने स्थानीय संपादक को बर्खास्त करना चाहिए. पर दिखावे के लिए और लीपापोती करने के लिए प्रबंधन ने दो पत्रकारों और दो गैर पत्रकारों को बर्खास्त कर दिया है, ऐसी चर्चा है, जो जागरण प्रबंधन का एक और रावणोचित कदम है. दैनिक जागरण, पटना के जिन पत्रकारों को बर्खास्त किये जाने की चर्चा है, उनके नाम हैं- प्रादेशिक इंचार्ज रवींद्र पांडेय और चीफ सब एडिटर अमित आलोक. जिन दो गैर पत्रकारों को बर्खास्त किए जाने की चर्चा है, उनके नाम हैं- फोरमैन शैलेंद्र कुमार और आपरेटर शैलेंद्र. अगर वाकई इन चारों लोगों की बर्खास्तगी हुई है तो इन्हें कोर्ट में जाकर यह मांग करनी चाहिए कि बर्खास्तगी की कार्रवाई स्थानीय संपादक के भी खिलाफ भी की जाए या फिर उन्हें भी बर्खास्तगी से मुक्त रखा जाए. सिर्फ उन्हें क्यों बलि का बकरा बनाया जा रहा है. दैनिक जागरण, पटना में पहले पन्ने पर जो मोटे अक्षरों में माफीनामा प्रकाशित किया गया है, उसे आप भी पढ़ लें…
हमें खेद है
संपादकीय चूक से पाठकनामा स्तंभ में 29 अक्टूबर को मधुबनी से आया एक पत्र जिसकी भाषा अमर्यादित थी, प्रकाशित हो गया। पत्र में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक पंक्तियां थीं। गहन जांच के बाद इस गलती के लिए जिम्मेदार पाए गए लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। ‘दैनिक जागरण’ इस तरह की भारी चूक से स्तब्ध है और खेद प्रकट करता है।
-स्थानीय संपादक
पर खबर है कि इस कवायद से भी कांग्रेस नेतृत्व खुश नहीं है. सूचना ये भी है कि जागरण समूह के सारे ठिकानों और धंधों का आकलन कांग्रेस नेतृत्व ने केंद्रीय एजेंसियों से कराना शुरू कर दिया है और इनके यहां कभी भी छापेमारी शुरू हो सकती है. बेहद कम दाम में पत्रकारों से काम कराने वाले और कर्मियों का तरह तरह से शोषण करने वाले गुप्ताज को ये श्रेय जाता है कि इन्होंने हिंदी में खबरों को बेचने का धंधा शुरू करके पत्रकारिता को पूरी तरह से गुप्ता जनरल स्टोर में तब्दील कर दिया.
पेड न्यूज के अपराधी गुप्ताज अपने गुर्गा टाइप मैनेजरों के सहयोग से उन पत्रकारों को प्रताड़ित करने से नहीं चूकते जो जागरण के गोरखधंधे के खिलाफ आवाज उठाते हैं. इसी कारण पिछले दिनों भड़ास के संस्थापक यशवंत सिंह और कंटेंट एडिटर अनिल सिंह के खिलाफ जागरण प्रबंधन ने फर्जी मुकदमे लिखाए और भरसक कोशिश की कि भड़ास का संचालन बंद हो जाए. इसके लिए भड़ास से जुड़े ठिकानों पर पुलिस से छापेमारी कराई गई, लैपटाप व कंप्यूटरों से हार्ड डिस्क गायब करा दिए गए और भड़ास को सर्वर प्रोवाइड करने वाली कंपनी से भड़ास का डाटा रिमूव करने को दबाव बनाया गया.
बावजूद इसके भड़ास जिंदा है और जागरण के काले धंधों और काले कारनामों के खिलाफ बेखौफ होकर आवाज उठा रहा है. हालांकि यूपी में सपा की सरकार आ जाने के बाद जागरण वाले यूपी पुलिस को अपने लठैत की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन यही यूपी पुलिस है जिसने मायावती सरकार के जमाने में जागरण के गुप्ताज को सड़क पर गिरा गिरा कर मारा था क्योंकि इन लोगों ने मायावती के खिलाफ जातिसूचक गालियों का इस्तेमाल किया था. सूत्रों का कहना है कि जागरण के दिन अब इसलिए पूरे होते दिख रहे हैं क्योंकि इनके खिलाफ अब कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व पूरी तरह गंभीर हो चुका है और इनके कुंडली तैयार कराई जा रही है. दूसरी ओर, कई लोगों ने जागरण के मालिकों और बड़े मैनेजरों की काली कमाई और अघोषित संपत्ति का लेखा जोखा तैयार कराना शुरू कर दिया है.
और ये है वो पत्र, जिसमें सोनिया, राहुल व प्रियंका के लिए अश्लील लिखा हुआ है…

मूल खबर पढ़ें–
दैनिक जागरण ने ये क्या छाप दिया सोनिया गांधी और उनके परिवार के लिए??
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