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सोशल मीडिया के लिए भी कंटेंट को लेकर मानदंड निर्धारित होना चाहिए

: लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका पर हुई चर्चा : पटना : इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया की तरह सोशल मीडिया के लिए भी कंटेंट को लेकर मानदंड निर्धारित होना चाहिए, ताकि खबरों की मर्यादा आहत न हो। ई-पत्रिका 'आह्वान' के पांच वर्ष पूरा होने के मौके पर रविवार को पटना में आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए संपादक वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि सोशल मीडिया ने वैचारिक अभिव्यक्ति को व्यापक, तीव्र और बहुआयामी विकल्प उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की भाषा, कंटेंट और कमेंट सकारात्मक, सार्थक और मर्यादित होना चाहिए। सेमिनार का विषय लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका पर केंद्रित था।

: लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका पर हुई चर्चा : पटना : इलेक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया की तरह सोशल मीडिया के लिए भी कंटेंट को लेकर मानदंड निर्धारित होना चाहिए, ताकि खबरों की मर्यादा आहत न हो। ई-पत्रिका 'आह्वान' के पांच वर्ष पूरा होने के मौके पर रविवार को पटना में आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए संपादक वीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि सोशल मीडिया ने वैचारिक अभिव्यक्ति को व्यापक, तीव्र और बहुआयामी विकल्प उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की भाषा, कंटेंट और कमेंट सकारात्मक, सार्थक और मर्यादित होना चाहिए। सेमिनार का विषय लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका पर केंद्रित था।

साहित्यकार मुसाफिर बैठा ने कहा कि आज अखबारों में भी सोशल मीडिया के कंटेंट को काफी जगह मिल रही है। लोग उसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं। चुनाव के संदर्भ में सोशल मीडिया का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि इसकी पहुंच एकदम सुदूर गांवों तक है। मोबाइल पर इंटरनेट आ जाने के बाद सोशल मीडिया का हस्तक्षेप काफी प्रभावी हो गया है।  वेबसाइट अपना बिहारडॉटओआरजी के संपादक नवल किशोर ने कहा कि सोशल मीडिया के लिए भी चुनाव के संदर्भ में गाइडलाइन तय होना चाहिए, ताकि उनका दुरुपयोग नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की तकनीकी अधिक विकसित और सहज हो गयी है। यूनिकोड ने कई समस्याओं का एकसाथ समाधान किया औ फांट की समस्या का समाधान हो गया।

अधिवक्ता मनीष रंजन ने कहा कि प्रिंट या इलेक्ट्रानिक मीडिया के सेट एजेंडे के खिलाफ सोशल मीडिया ने एजेंडों को खारिज कर दिया है। कई बार किसी खास नीति या पार्टी को लेकर परंपरागत मीडिया वाले एकस्वर से आवाज उठाते हैं, जबकि सोशल मीडिया में मुद्दों के पक्ष या विपक्ष में व्यापक बहस की संभावना बरकरार रहती है। पत्रकार फिरोज मंसूरी ने कहा कि आज देश के समक्ष वैचारिक संकट का खतरा है। इस संकट से उबारने की ताकत सिर्फ सोशल मीडिया में है। राजनीति व्यक्तिवाद की ओर बढ़ रही है। विचारधारा कट्टरता की ओर बढ़ रही है। ऐसे स्थिति में सोशल मीडिया वैचारिक विविधता का मंच उपलब्ध कराता है।

सामाजिक कार्यकर्ता उदयन राय ने कहा कि संकट ईमान का भी है। राजनीति में न पार्टी नेता के प्रति प्रतिबद्ध है और न नेता पार्टी को लेकर ईमानदार है। पार्टियों के बीच सिर्फ अवसर का भेद रहा गया है। जिसको जहां मौका मिलता है, वहां लाभ के लिए पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एक समर के समान है और इस क्षेत्र में निर्भय होकर काम करना होगा। पत्रकार श्यामसुंदर ने कहा कि सोशल मीडिया एक क्रांति के समान है और इसने सभी वर्गो को अभिव्यक्ति की आजादी दी है। इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया में अब भी कुछ जातियों का आधिपत्य कायम है, लेकिन सोशल मीडिया ने उस आधिपत्य को चुनौती दी है। यह एक सकारात्मक पक्ष है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए। धन्यवाद ज्ञापन अमित कुमार ने किया। कार्यक्रम के दौरान आह्वान की हार्डकॉपी का वितरण भी किया गया।

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