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सोशल मीडिया क्रांति का नया अस्त्र : केजी सुरेश

देहरादून : सोशल मीडिया आधुनिक क्रांति का नया अस्त्र है। इसके माध्यम से आज की पीढ़ी अपने विचारों का आदान प्रदान कर रही है। इस माध्यम से समाज में एक नई तरह की जागरूकता आती दिखाई दे रही है। ये माध्यम महिला सशक्तिकरण का भी अच्छा उपकरण साबित हो रहा है। यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया क्रिटिक केजी सुरेश का। श्री सुरेश शनिवार को विद्योतमा विचार मंच के बैनर तले आयोजित विचार गोष्ठी नारी शक्ति के उत्थान में मीडिया की भूमिका को बतौर मुख्यवक्ता संबोधित कर रहे थे।

देहरादून : सोशल मीडिया आधुनिक क्रांति का नया अस्त्र है। इसके माध्यम से आज की पीढ़ी अपने विचारों का आदान प्रदान कर रही है। इस माध्यम से समाज में एक नई तरह की जागरूकता आती दिखाई दे रही है। ये माध्यम महिला सशक्तिकरण का भी अच्छा उपकरण साबित हो रहा है। यह कहना है वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया क्रिटिक केजी सुरेश का। श्री सुरेश शनिवार को विद्योतमा विचार मंच के बैनर तले आयोजित विचार गोष्ठी नारी शक्ति के उत्थान में मीडिया की भूमिका को बतौर मुख्यवक्ता संबोधित कर रहे थे।

विश्व संवाद केन्द्र पर आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी में स्वामी विवेकानन्द को जानने की प्रबल उत्कंठा देखने को मिल रही है। स्वामी विवेकानन्द को जानने वालांे को यह भी जानने का मौका मिलेगा कि स्वामी जी ने महिलाओं के विकास को समाज के विकास का वास्तविक पैमाना माना था। उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं की स्थिति संतोषजनक है लेकिन मीडिया द्वारा इसकी छवि को और बेहतर पेश किया जाना चाहिए। श्री सुरेश ने कहा कि देश में विगत दिनों महिलाओं के साथ हुई कुछ घटनाओं को बढ़ाचढ़ा कर दिखाया गया जिससे बाहर भारत की छवि पर असर पड़ा। आज विदेशों में ऐसी छवि बनाई जा रही है जैसे भारत में महिलाएं सुरक्षित नहीं है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा की बजाय मीडिया अपनी टीआरपी बढ़ाने को ध्यान में रखती है इस मानसिकता में बदलाव लाने  की आवश्यकता है। नकारात्मक रिपोर्टिंग की बजाय उनकी उपलब्धियों पर फोकस करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश में आज यदि महिलाओं के सामने कई तरह की कठिनाईयां है तो कई उपलब्धियां भी हैं। उन्होंने माना कि आज देश में महिलाओं और पुरूषों की समस्याओं में कोई मूलभूत अन्तर नहीं दोनों ही वर्ग गरीबी और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोच में परिवर्तन लाने की जरूरत है और महिलाओं के समाज में राजनीति में जो भेदभाव है उसे समाप्त करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण से ही महिलाओं का विकास नहीं होगा बल्कि उनमें जागरूकता आने से उनका सही मायने में विकास होगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मजबूत लोकतंत्र के लिए जागरूक मतदाता आवश्यक होता है उसी तरह मजबूत मीडिया के लिए जागरूक दर्शक और पाठक अनिवार्य है। महिलाओं के सर्वोत्तम विकास में मीडिया अपना क्या योगदान दे सकता है इस पर उसे गंभीरता से सोचना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं और पुरूषों में कोई बहुत असमानता नहीं है क्योकि यहां अर्धनारीश्वर और अर्ध्दांगिनी का सिद्धान्त प्रचलित रहा है। उन्होंने महिलाओं के विकास में मीडिया के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए उसे और बेहतर बनाने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए डॉ. हर्षवंती बिष्ट ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और उसके महत्व को जानने के लिए लोगों को स्वामी विवेकानन्द जी के साहित्य का अध्ययन करना चाहिए। स्वामी जी ने कहा था कि किसी भी समाज की उन्नति की जानकारी उसके महिला समाज की स्थिति से लगाया जाता है। उन्होंने महिला विकास को ही किसी समाज की उन्नति मापने का पैमाना बताया था। उन्होंने कहा कि हालांकि स्वामी जी के बाद से समय के साथ साथ बहुत परिवर्तन भी आया है। ये परिवर्तन सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह का है। उन्होंने भारतीय समाज में महिला और पश्चिमी समाज में महिलाओं की स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि हमारे समाज में महिला का दर्जा मां के रूप में सदैव पूज्यनीय रहा है जबकि पश्चिमी समाज में ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि स्त्री को प्रगति की ओर ले जाने के लिए उसका शिक्षित होना आवश्यक है। डॉ. बिष्ट ने कहाकि एक शिक्षित नारी ही आदर्श और वीर और आदर्श संतान का निर्माण कर सकती है।

उन्होंने आज नारी के प्रति हो रही हिंसा का कारण बताते हुए कहा कि नरी के प्रति कम होती श्रद्धा के कारण महिला अपराधों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके मूल में हमारे संस्कारों और परांपराओं की उपेक्षा भी एक बिंदू है जिसके कारण समाज में नकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए जागरूक रहना होगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ. शारदा त्रिपाठी ने कहा कि आज महिला सशक्तिकरण में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि आज हमारे देश की बच्चियों के समाने मीडिया ने कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स, किरण मजूमदार शॉ, इंदिरा नूई, आदि जैसे आदर्श स्थापित किए है जिनसे भावी पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है। उन्होंने भारतीय नारी और विदेश की नारी की सोच में मूलभूत अंतर बताया और कहा कि भारत की नारी का अपना एक आदर्श है अपनी एक सोच है पाश्चात्य की नारी में जिसका अभाव है। उन्होंने भारतीय नारी के विकास में मीडिया के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए संतोष जताया और महिलाओं के विकास को ही समाज के विकास को मापने का  सर्वोत्तम थर्मामीटर बताया।

कार्यक्रम का संचालन रीता गोयल ने किया। जबकि डॉ. रश्मि त्यागी रावत ने वंदेमातरम् का गायन किया। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, संपादक राष्ट्रदेव डॉ. प्रभाकर उनियाल, हिन्दुस्थान समाचार के ब्यूरो चीफ धीरेन्द्र प्रताप सिंह,रंजीत सिंह ज्याला, अनिल सती, रविन्द्र कटारिया, श्रीमती मालिनी जिन्दल, श्रीमती सुधा भट्ट, श्रीमती शर्मिला भट्ट, श्रीमती सोभना रावत स्वामी, श्रीमती विनोद उनियाल, भाजपा महानगर अध्यक्ष श्रीमती नीलम साहगल, श्रीमती तारा देवी, श्रीमती मंजू कटारिया, श्रीमती योगेश शर्मा, सुश्री हेमा शर्मा, श्रीमती गायत्री अग्रवाल, श्रीमती आशा अग्रवाल सहित नगर के कई प्रबुद्ध गणमान्य उपस्थित थे।

प्रेस रिलीज

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