रांची : मौलाना आजाद बड़ी मुश्किल से आए चिराग थे, जो इस जहां को रोशन कर चले गए। उनके द्वारा निकाला गया साप्ताहिक अखबार 'अल हिलाल' महज एक अखबार नहीं, बल्कि आजादी का पैगाम था। यह बातें राज्यपाल सैयद अहमद ने शुक्रवार को कही। राज्यपाल 'अल हिलाल' पत्रिका की सौवीं वर्षगांठ पर रांची विवि के सीनेट हॉल में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। यह साप्ताहिक अखबार 13 जुलाई 1912 को कलकत्ता से निकाला गया था।
इस पत्रिका ने युवाओं के सामने देश की सही तस्वीर पेश करते हुए उन्हें राष्ट्रवादी सोच की ओर प्रेरित किया। राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम से युवाओं को जोड़ने के लिए अहिंसक रास्ते की पैरवी की। उनकी इस विचारधारा ने उन्हें गांधीजी के नजदीक ला दिया। कहा, मौलाना अबुल कलाम ने अपने नाम के साथ उसी समय आजाद जोड़ लिया था, जब हमारा देश आजाद नहीं था। मौके पर रांची विवि के कुलपति ने कहा, रांची विवि पहला विवि है, जहां इस साप्ताहिक पत्रिका का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। इस पत्रिका ने उस समय लोगों में देशभक्ति का जोश भरा था।
इससे पहले कार्यक्रम में आए विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षकों का स्वागत किया गया। छात्राओं ने जय-जय-जय रांची गुरुकुल जन गीत से अतिथियों का स्वागत किया। प्रोवीसी वीपी शरण ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस दौरान महामहिम सैयद अहमद, रांची विवि के वीसी प्रो. एलएन भगत, प्रोवीसी वीपी शरण, ऊर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जमशेद कंवर, ईरान कल्चरल हाउस परसियन रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ.अली रेज्जा ख्वाजे, दिल्ली विवि के प्रो.चंद्रशेखर, डॉ. ख्वाजा मो. एकरमुद्दीन, अलीगढ़ मुस्लिम विवि के प्रो.शफी किदवई समेत कई लोग उपस्थित रहे। साभार : जागरण





