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स्ट्रिंगरों का करोड़ों का मेहनताना साधना वालों ने हड़पा

आर्थिक बदहाली और भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके साधना न्यूज के स्ट्रिंगर्स लामबंद हो रहे हैं. अब ये सभी साधना न्यूज चैनल के मालिकों के खिलाफ दिल्ली में धरना प्रदर्शन और आंदोलन करने जा रहे हैं. आर्थिक शोषण और उत्पीड़न के शिकार संवाददाता-स्ट्रिंगरों  ने साधना न्यूज चैनल के मालिकों और प्रबंधकों के कारनामों की पूरी फेहरिश्त तैयार की है. इस फेहरिश्त में कुछ 'आधिकारिक दस्तावेज' भी शामिल हैं. 

आर्थिक बदहाली और भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके साधना न्यूज के स्ट्रिंगर्स लामबंद हो रहे हैं. अब ये सभी साधना न्यूज चैनल के मालिकों के खिलाफ दिल्ली में धरना प्रदर्शन और आंदोलन करने जा रहे हैं. आर्थिक शोषण और उत्पीड़न के शिकार संवाददाता-स्ट्रिंगरों  ने साधना न्यूज चैनल के मालिकों और प्रबंधकों के कारनामों की पूरी फेहरिश्त तैयार की है. इस फेहरिश्त में कुछ 'आधिकारिक दस्तावेज' भी शामिल हैं. 

ये दस्तावेज भडा़स को भी भेजे गए हैं. पहली नजर में सभी दस्तावेज ऑरिजनल लगते हैं और स्ट्रिंगरों के आरोपों की पुष्टि भी करते हैं. स्ट्रिंगर्स का आरोप है कि साधना वाले उनका लगभग दो करोड़ रुपये से ज़्याद का भुगतान दबा कर बैठ गए हैं. ये रकम अधिकतम सात हजार रुपए प्रतिमाह प्रति स्ट्रिंगर की दर से है. साधना वालों की इस हरकत से स्ट्रिंगरों के सामने भुखमरी के हालात बन गए हैं. इन स्ट्रिंगरों में से काफी कुछ तो ऐसे हैं जिन्होंने पचास-पचास हजार रुपये बतौर सिक्योरिटी साधना न्यूज चैनल में जमा किये हैं. इन स्ट्रिंगरों की सिक्योरिटी तो अभी तक वापस की नहीं गई है, अब उनका मेहनताना भी हजम करने का षडयंत्र चलाया जा रहा है. जब स्ट्रिंगर अपना बकाया भुगतान मांगते हैं तो उनकी जगह किसी दूसरे को आईडी दे दी जाती है.

कुछ स्ट्रिंगर्स ने साधना न्यूज चैनल में सिक्योरिटी जमा करने के लिए के अपनी मां-पत्नी के जेवर गिरबी रख कर कर्ज उठाया था. ये जेवर डूबे, सिक्योरिटी भी डूबी और मेहनताना मिलने के आसार भी नहीं हैं. साधना वालों ने जब मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ चैनल शुरु किया तो स्ट्रिंगरों का मेहनताना 450 रुपये प्रति स्टोरी था. बिहार-झारखण्ड चैनल शुरु करने के कुछ दिनों के भीतर ही मेहनताना 200 रुपये प्रति स्टोरी कर दिया. स्ट्रिंगरों के मुताबिक बीते साल 2012 में साधना वालों ने अपनी आर्थिक स्थिति का वास्ता देते हुए कहा था कि स्ट्रिंगरों को प्रति स्टोरी भुगतान की जगह अधिकतम सिर्फ सात हजार रुपये प्रतिमाह ही मिलेंगे लेकिन स्टोरीज पहले की तरह ही भेजनी होंगी. साधना वालों के इस फरमान से कई स्ट्रिंगरों ने काम छोड़ दिया और अपना बकाया पैसा मांगा वो भी अभी तक नहीं दिया गया है.

साधना में पेड स्टाफ सिर्फ नोएडा में है या फिर भोपाल,रायपुर,इंदौर, लखनऊ, पटना, रांची और देहरादून में दो-दो एक-एक पेड स्टाफ है चैनल में लगभग सभी स्टोरी स्ट्रिंगरों की ही चलती हैं. साधना न्यूज के  पेड स्टाफ के नियुक्ति पत्र में भी वसूली का लक्ष्य भी लिखा जाता है. साधना न्यूज के मौजूदा प्रबंधकों की बेईमानी-छल और प्रपंची नीतियों की वजह से ही साधना न्यूज चैनल का डिस्ट्रीब्यूशन भी निल हो गया है. साधना न्यूज चैनल छोटे-बड़े शहरों और कस्बों में तो बंद पड़ा ही है, राज्यों की राजधानियों जैसे भोपाल, रायपुर, पटना, रांची, लखनऊ में भी साधना न्यूज चैनल काफी लम्बे समय से बंद पडा़ हुआ है.
देर से ही सही मगर अपने हितों की हिफाजत के लिए लामबंद हुए स्ट्रिंगरों ने साधना न्यूज चैनल के खिलाफ दिल्ली पहुंच कर आंदोलन की योजना बनाई है. आंदोलन शुरु करने का दिन व समय तय करने के लिए ये सभी स्ट्रिंगर्स दिल्ली में इकट्ठा हो रहे हैं. कुछ स्ट्रिंगरों ने सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी से भी सम्पर्क साधा है. जहां से उन्हें सकारात्मक संकेत मिले हैं.

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