Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

विविध

स्मरण रवि नागर : स्वप्न मरता नहीं

प्रगतिशील जनगायक, संगीतकार इप्टा के 30 साल के साथी रवि नागर की पहली पुण्य तिथि, 21 अप्रैल, 2013 पर उन्हें गीत संगीत के माध्यम से याद किया गया। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में इप्टा और साझी दुनिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘स्वप्न मरता नहीं’ में रवि नागर के पुत्र अनादि नागर ने अपने पिता से सीखे हुए गीत ज़ेहरा निगाह की रचना ‘जबसे मैंने आँखे खोली’ मुक्तिबोध की कविता ‘मैं देखता क्या हूँ कि पृथ्वी के प्रसारों पर’ प्रस्तुत की। 

प्रगतिशील जनगायक, संगीतकार इप्टा के 30 साल के साथी रवि नागर की पहली पुण्य तिथि, 21 अप्रैल, 2013 पर उन्हें गीत संगीत के माध्यम से याद किया गया। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में इप्टा और साझी दुनिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘स्वप्न मरता नहीं’ में रवि नागर के पुत्र अनादि नागर ने अपने पिता से सीखे हुए गीत ज़ेहरा निगाह की रचना ‘जबसे मैंने आँखे खोली’ मुक्तिबोध की कविता ‘मैं देखता क्या हूँ कि पृथ्वी के प्रसारों पर’ प्रस्तुत की। 

अनादि के साथ हारमोनियम पर श्री महेश्वर दयाल नगर और तबले पर रवि के अज़ीज़ मित्र अरुण भट्ट ने संगत की। इंडियन आइडियल से प्रसिद्ध हुए साथी कुलदीप ने ‘मैं मिटूंगा नहीं मेरे शहर की दीवारों’ गाया। अर्चना राज और रवि के शिष्य नीरज चतुर्वेदी ने अपनी प्रस्तुतिओं के माध्यम से रवि को श्रद्धांजलि दी। प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने भी निर्गुण व गजलें प्रस्तुत कीं। मालिनी के साथ गिटार पर राकेश आर्य, तबले पर अरुण भट्ट, ढोलक पर विनोद प्रसाद और की बोर्ड पर गुंजन मैसी ने संगत की।

इस अवसर पर विशेष तौर पर जोधपुर से आये रवि के साथी व मित्र जैपू खां लांगा और उनके साथियों ने अपने गीत-संगीत से पूरे प्रेक्षागृह को राजस्थानी रँग में रंग दिया। जैपू खां और साथियों ने लुम्बा-लुम्बा, म्हारो जंगल मंगल देस, जब देखूं वनरी लाल पीली अँखियाँ, मन लगो मेरो यार फकीरी में, केसरिया बालम, वैष्णव जन तो तेने कहिये, निंबूड़ा- निंबूड़ा और अन्य रचनायें सुनायीं। साथी दीपक कबीर और ऋषि ने रवि की रचनाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग दिखाई। डॉ. रूपरेखा वर्मा, विलायत जाफ़री, सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ, जुगल किशोर, नरेश सक्सेना, राकेश व अन्य रचनाकारों ने रवि को पुष्पांजलि दी। कर्यक्रम का संचालन रवि के अभिन्न मित्र रंगकर्मी आतमजीत सिंह ने किया।

इसे क्या सिर्फ़ इत्तेफाक ही कहा जायेगा कि रवि नागर ने इस संसार से 21, अप्रैल को विदा ली जिस दिन पकिस्तान में विरोध की संस्कृति की एक बहुत ही महत्वपूर्ण अलमबरदार गायिका इक़बाल बानो और ‘सारे जहाँ से अच्छा हिदोस्तान हमारा’, ‘लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी’ और ‘खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले’ जैसी मशहूर रचनायें करने वाले शायर डॉ. अल्लामा इक़बाल ने भी इस दुनिया को छोड़ने के लिए यही तारीख़ मुक़र्रर की। 21, अप्रैल, 2013 को अल्लामा इक़बाल की 75वीं, इक़बाल बानो की चौथी और साथी रवि नागर की पहली बरसी थी।

गौरतलब है कि रवि नागर के पहले गुरु पं. के. महावीर जी राजस्थान के ही थे जिनसे लता मंगेशकर, आशा भोंसले व अन्य कई सुप्रसिद्ध गायक समय समय पर तालीम लेते रहे। रवि के गाने के अंदाज़ में उस्ताद मेहदी हसन, अहमद हुसैन मोहम्मद हुसैन व कई प्रसिद्द गायकों का रंग देखा जा सकता है जिनकी जड़ें राजस्थान की हैं। उसके पूरे सांगीतिक वितान में राजस्थान की मिट्टी महकती है। रवि ने मुंबई में महावीर जी के घर पर रहकर उनसे विधिवत गुरु-शिष्य परम्परा के अंतर्गत शिक्षा ली। साथी रवि को कितने आयामों में याद किया जा सकता है ये तय करना बहुत मुश्किल है क्योंकि वो बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। मंच नाटक संगीत, नुक्कड़ नाटक का संगीत, एकल और समूह कत्थक नृत्य प्रस्तुतियाँ, नृत्य नाटिकाएं, जन आवाहन गीत, आधुनिक व प्रगतिशील छंद मुक्त कविताओं को संगीतबद्ध करना और गाना, ग़ज़ल, नज़्म, भजन, लोक संगीत, आदिवासी संगीत, बच्चों के लिए सांगीतिक रचनायें, ललित कलाओं में ध्वनित होते संगीत पर गहन मनन-चिंतन, टीवी, रेडियो रिकोर्डिंग, स्टूडियो रिकोर्डिंग और इन सब के साथ साहित्य का अध्ययन जैसे अनेक पक्ष हैं जो रवि के सम्रद्ध व्यक्तित्व को परिलक्षित करते रहेंगे।

धार्मिक नारों के ज़रिये उन्माद फैलाने के विरुद्ध रवि की प्रसिद्ध आवाहन गीत ‘आज़ादी ही आज़ादी’ आज सारे देश में विरोध का प्रतीक बन गया है जिसे पिछले वर्ष दिसंबर में दिल्ली में हुए समूहित बलात्कार और हत्या के विरोध में राष्ट्रपति भवन पर उमड़े जन सैलाब और हाल में ही एक पांच साल कि बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के विरोध में एकत्रित जनता का मार्चिंग गीत भी यही ‘आजादी ही आज़ादी’ है, जिसे रवि ने हिंदुस्तान के कोने-कोने तक पहुंचा दिया। साथी रवि नागर का ये आवाहन विरोध की रचनात्मक संस्कृति का प्रतिनिधि गीत है। रवि जैसे मौलिक संगीतकार-गायक, जुझारू रंगकर्मी, अदम्य जीवट से भरपूर और एक बहुत ही संवेदनशील व बेहतरीन इंसान को सही मायनों में श्रद्धांजलि तभी होगी जब आज के युवा संगीतकार, गायक, अभिनेता, जनांदोलनों से जुड़े साथी व अन्य विधाओं के से जुड़े युवा रचनाकार उनके पूरे जीवन और रचना संसार से प्रेरणा लेते रहें।

अखिलेश दीक्षित की रिपोर्ट.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...