इमरजेंसी खत्म हो गई थी और लोकसभा के चुनाव निकट थे। उन्हीं दिनों समानांतर कहानी आंदोलन के प्रणेता कमलेश्वर कानपुर आए। वे कानपुर में कामतानाथ के खलासी लाइन स्थित आवास में रुकते थे। हम लोग उनसे मिलने गए। हमारे साथ मोना और सुमनराज भी थे। अचानक तभी वहां मौजूद प्रलेस के सचिव ललित मोहन अवस्थी ने कहा कि अब फासिस्ट ताकतों के दिन आ गए। इंदिरा गांधी के जाते ही ये ताकतें देश में काबिज हो जाएंगी और अब हिटलरशाही चलेगी।
ललित मोहन अवस्थी कोई इंदिरा गांधी या कांग्रेस के प्रवक्ता नहीं थे लेकिन इंदिरा गांधी और कांग्रेस ने बड़ी चतुराई से अपने को मध्यम मार्गी बताकर सारी इमरजेंसी विरोधी ताकतों को फासिस्ट करार दे दिया था। कामता जी रिजर्ब बैंक की जिस यूनियन से जुड़े थे वह माकपा समर्थित थी यानी इमरजेंसी विरोधी और मैं, मोना तथा सुमनराज एमएल समर्थक। अवस्थी जी की इस टिप्पणी से सभी हतप्रभ रह गए। कामता जी ने चतुराई से बात और जगह मोड़ दी वर्ना लेखकों के बीच विचारधारा का अभाव पता नहीं क्या कर देता।
कांग्रेस आज भी खुद को ही सर्वजन हिताय मानती है। यानी कांग्रेस ही भ्रष्टाचार और धार्मिक कठमुल्लेपन से बाहर है बाकी के सारे दल फासिस्ट और जातिवादी। न लेफ्ट न राइट ओनली सेंटरिस्ट यानी सबसे सही मौकापरस्त। जो पार्टी अब तक चेन्नई में राज कर रहे करुणानिधि के एक बेटे स्टालिन के हर अपराध और माफियागिरी पर कभी कुछ नहीं बोली वह अचानक आज उनके विरुद्ध सीबीआई की जांच लेकर आ गई। लेकिन वही पार्टी करुणानिधि के दूसरे बेटे और मदुरई के राजा अलागिरि के खिलाफ चुप्पी साधे है। वजह साफ है स्टालिन केंद्र की कांग्रस सरकार को द्रमुक के समर्थन के विरुद्ध हैं और अलागिरि कांग्रेस समर्थन के पक्षधर।
वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल के फेसबुक वॉल से साभार.






