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हथकड़ियां उन हाथों में हो सकती हैं जिन हाथों ने खुर्शीद को मरने पर मजबूर किया

Deepak Sharma : जुर्म या तो होता है या नहीं होता… अपनी ज़िन्दगी में बदनामी के अंतिम ओवर खेल रहे खुर्शीद अनवर ने बलात्कार के इलज़ाम में घिरने के बाद चार ख़त लिखे थे….

Deepak Sharma : जुर्म या तो होता है या नहीं होता… अपनी ज़िन्दगी में बदनामी के अंतिम ओवर खेल रहे खुर्शीद अनवर ने बलात्कार के इलज़ाम में घिरने के बाद चार ख़त लिखे थे….

१) पुलिस डायरी के मुताबिक खुर्शीद ने एक ख़त अपने मित्र आशुतोष को लिखा जिसमे उन्होंने संदेह ज़ाहिर किया की वो एक साज़िश में फंस गये है. अंग्रेजी में लिखे इस ख़त का प्रिंट आउट पुलिस को खुर्शीद के घर में उनके स्टडी रूम से मिला.

२) दूसरा ख़त भी अंग्रेजी में किसी नलिनी को लिखा गया है. इसका भी कंप्यूटर प्रिंट आउट पुलिस को मिला. इस ख़त में खुर्शीद ने नलिनी से कहा की उस रात उन्होंने कुछ भी गलत नही किया लेकिन पीडिता उनपर बलात्कार के इलज़ाम लगा रही है.

३) तीसरा प्रिंट आउट भी स्टडी रूम की मेज़ से मिला है जो उन्होंने पीड़िता को लिखा. ये एक बेहद अहम सबूत है खुर्शीद की खुदकशी में. पुलिस के मुताबिक खुर्शीद ने पीडिता से कहा कि आखिर वो क्यूँ कीचड उछाल रही है. और अगर पीड़िता को लगता है की नशे में उन्होंने उसके साथ बलात्कार किया था तो उसने कपड़ों से लेकर मेडिकल कराने तक के सबूत क्यूँ नही संजो कर रखे.

४) पुलिस को एक चौथा सबूत भी स्टडी रूम से मिला.ये ख़त हिंदी में है और कंप्यूटर का ही प्रिंट आउट है. खुर्शीद ने इस ख़त में खुद को बेगुनाह बताया है.

मित्रों खुर्शीद ने अपने अपार्टमेन्ट की छत से कूदकर जान दे दी लेकिन इस खुदकशी ने उन पर लगे बलात्कार के आरोप को नये तरीके से परिभाषित किया हैं. सच यही है कि जिन लोगों ने उन्हें बलात्कार की इस कच्ची कहानी में कसूरवार माना वो अब बचाव की मुद्रा में हैं.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक अगर बलात्कार की कहानी कच्ची ही साबित हुई तो हथकड़ियां कलाई बदल लेंगी. जी हाँ, हथकड़ियां उन हाथों में हो सकती हैं जिन हाथों ने खुर्शीद को मरने पर मजबूर किया. बहरहाल मामला बेहद संगीन होता जा रहा है और मे अपनी ओर से किसी भी पक्ष को कटघरे में खडा नही करना चाहता. वैसे भी ….जुर्म या तो होता है या नही होता.

आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पत्रकार दीपक शर्मा के फेसबुक वॉल से.

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