संपादक आलोक मेहता की कांग्रेस के 'अघोषित प्रवक्ता' के तौर पर लम्बे समय से छिछालेदर होती रही है. पर इस बार मेहता ने चाटुकारिता की सारी हदें पार करते हुए निष्पक्ष पत्रकारिता को भी नीचा दिखाने का काम किया है. 22 अप्रैल को प्रकाशित नेशनल दुनिया के प्रथम पृष्ठ पर मेहता ने अपनी विशेष टिप्पणी में बेशर्मी की हद पार करते हुए लिखा है, ''अग्नि की सफलता पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के बधाई संदेश अवश्य पढ़ने-सुनने को मिले, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के किसी शीर्ष नेता का बधाई संदेश देखने को नहीं मिला.'' जबकि वास्तविकता यह है कि 19 अप्रैल को ही भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अपने बधाई संदेश जारी कर दिए थे.
भाजपा के आधिकारिक वेबसाइट पर भी अग्नि पांच के सफलता के लिए बधाई दी गई थी. लेकिन लगता है कि आलोक मेहता ने पत्रकारिता की हत्या करके कांग्रेस की चमचागिरी करने को ही अपना पत्रकारीय धर्म समझ लिया है. कांग्रेस ने पद्म पुरस्कार तो दे ही दिया है, इतना चामचागिरी देखते हुए अब शायद राज्य सभा भी भेज दे. खैर, आप लोग भी देखिए आलोक मेहता की विशेष टिप्पणी और भाजपा की वेबसाइट पर बधाई संदेश.

नेशनल दुनिया में प्रकाशित आलोक मेहता की टिप्पणी

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





