: युवतियों को बना दिया कालगर्ल : अखबारों में आजकल खूबसूरत औरतों से दोस्ती बढ़ाकर हजारों रुपये कमाने के विज्ञापन धड़ल्ले से छप रहे हैं। मीडिया के इस बहकावे के कारण नयी पीढ़ी बर्बाद हो रही है। सात जून की रात रांची के एक होटल में दो बच्चियां मिलीं। वे किसी प्रेम संबंध के चक्कर में थीं या मौज मस्ती के चक्कर में, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। एक बच्ची की मां ने पुलिस की मदद से उसे ढूंढ निकाला। दूसरे दिन दोनों को पुलिस ने घर वालों के हवाले कर दिया।
मास-मीडिया की परोसी सामग्री के कारण, ऐसी बच्चियां किसी भी घर की हो सकती हैं, उन्हें बदनाम करके आत्महत्या जैसी स्थितियों की ओर धकेल रहा है। ऐसी बहन-बेटियों को सही राह दिखाने के बदले मीडिया का एक हिस्सा उन्हें बदनाम कर रहा है। सात जून के उस मामले की खबर प्रभात खबर ने बेहद संतुलित तरीके से छापी। हिंदुस्तान ने भी ठीक ठाक खबर छापी, लेकिन दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट ने उन्हें सेक्स रैकेट का भंडाफोड जैसे सनसनीखेज शीर्षकों से छापने की होड़ लगा दी।
इन अखबारों ने देखते ही देखते बहन-बेटियों को कालगर्ल बना डाला। यहां तक कि दूसरे दिन जब पुलिस ने दोनों को परिवार के हवाले कर दिया तो कुछ अखबारों ने यह सच्चाई पाठकों को बताने के बदले भ्रामक खबरें दीं। यहां तक की बच्चियों के माता-पिता को कथित मां-बाप की संज्ञा दी। वर्गीकृत विज्ञापन के जरिये बहकाने और कोई बचपना हो जाने पर आत्महत्या की ओर धकेलने वाले इस मीडिया को सजा कौन देगा? फिलहाल ऐसे लोग चैन से रहें क्योंकि ऐसी बच्चियां आत्मघात तो जानती हैं, प्रतिघात नहीं जानतीं।

दैनिक भास्कर

हिंदुस्तान

आई नेक्स्ट

दैनिक जागरण

प्रभात खबर
यह खबर एक ऐसे पाठक ने भेजी है, जो उन बच्चियों के बारे में कुछ नहीं जानता लेकिन अलग-अलग अखबार में छपी खबर के आधार पर यह मानता है कि कुछ अखबारों ने एक छोटी सी चीज को बड़े अपराध में बदलकर अन्याय किया है।






