Ashish Maharishi : जयपुर से एक पत्रिका निकलती है 'हनीमनी'.. कई अनुवाद किए… जब मेहनताना माँगा, तब पत्रिका के मालिक कंगाल निकले… इसी तरह बरसों पहले भोपाल में एक पत्रकार के पास खाने को पैसे नहीं थे… मुसीबत में हज़ारों उधार दिए भाई को और आज तक नहीं मिले.. अफ़सोस दोनों बार पत्रकार ही धोखेबाज़ मिले। समय आ गया है ऐसे लोगों का नाम सार्वजानिक किया जाए.
दैनिक भास्कर में कार्यरत पत्रकार आशीष महर्षि के फेसबुक वॉल से.






