Mayank Saxena : चलिए मान लीजिए टाटा का बयान ही सच है…जमशेदपुर प्लांट में हुए धमाके में किसी की जान नहीं गई, सिर्फ 5 लोग घायल हैं…लेकिन ये भी सच है कि इसी प्लांट में 2008 में इस प्लांट में हुए हादसे में एक कर्मचारी की जान भी गई थी… क्या ये साफ नहीं है कि इस प्लांट में सुरक्षा को लेकर लापरवाही हो रही है…ऑफ द रेकॉर्ड जमशेदपुर के एक साथी पत्रकार की मानें तो "हम लोग बारूद के ढेर पर बैठे हैं…कभी भी जमशेदपुर दूसरा भोपाल बन जाएगा…"
अब सवाल ये है कि क्या 1 दर्जन लोगों का टाटा के प्लांट में घायल हो जाना ख़बर नहीं है…अच्छा मान लीजिए सिर्फ रतन टाटा को खरोंच भी आ जाती इस प्लांट में…तो ख़बर थी या नहीं…क्या आने वाले ख़तरे का अंदेशा भी ख़बर नहीं है…फिर 2012 में धरती के अंत की 2000 साल पुरानी भविष्यवाणी ख़बर कैसे थी…
क्या हो गया आप को प्रभाष जोशी के शिष्यों…एस पी सिंह के चेलों…माथुर साहब के मानस पुत्रों…आप लोग काहे नहीं मुद्दे को ख़बर बना रहे हैं…जन सरोकारों के प्रतिनिधि साहबों…'डंके की चोट पर' चीखने…'मुद्दों' की छाती पर 'दस्तक' देने वालों…प्राइम टाइमियों…सम्पादकों…प्रबंध सम्पादकों…जनता की आवाज़ों…अरे कहां सम्पादकीयों के माननीयों…
सब चुप हैं…अगली बार जब ये किसी मंच पर खड़े होकर प्रभाष जोशी के साथ अपनी प्रगाढ़ता और एस पी सिंह की महानता के संस्मरण बखान रहे हों…तो इनके मुंह पर हूट कर के चले आइएगा…ये इसी लायक हैं…या शायद इसके भी नहीं…
xxx
Mayank Saxena : थोड़ी देर पहले टाटा स्टील के जमशेदपुर कारखाने में धमाके की ख़बर आई…हम ने ख़बर को साझा किया…ख़बर कुछ वेबसाइटों और फेसबुक-ट्विटर पर सक्रिय कुछ साथियों के माध्यम से आई…लेकिन ख़बर को मुख्यधारा के मीडिया पर लगातार अंडरप्ले किया जाता रहा…टाटा की ओर से आधिकारिक बयान में कह डाला गया कि सिर्फ 12-15 लोग घायल हुए हैं… लेकिन अभी जब हम दोबारा उन वेब पेजेस पर गए, तो हम ने पाया कि वो पेज ही लुप्त हो गए हैं…और उनकी जगह दूसरी ख़बर डाल दी गई है…तमाम वेबसाइट्स से ख़बर अचानक गायब हो जाने और मेन स्ट्रीम मीडिया के इसे बिल्कुल तूल न देने के पीछे की वजह क्या हो सकती है पता नहीं…लेकिन विश्वस्त सूत्रों की मानें तो ये बड़ा हादसा है…और इसे दबाने के लिए काफी दबाव है…
प्रखर पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.






