रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष ने पत्रिका के पत्रकारों के प्रवेश पत्र निरस्त किए जाने पर उच्च न्यायालय द्वारा जारी नोटिस का जवाब देने से आज यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उनकी व्यवस्था न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं है। अध्यक्ष ने प्रश्नकाल के तुरन्त बाद सदन में गत 30 मार्च की रात को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा दी गई नोटिस का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान पत्रिका प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा रायपुर से प्रकाशित पत्रिका के पत्रकारों को पत्रकार दीर्घा के लिए जारी प्रवेश पत्रों को निरस्त करने सम्बन्धी उनकी 24 मार्च को दी गई व्यवस्था को आधार बनाकर प्रस्तुत याचिका पर न्यायालय ने यह नोटिस जारी किया है।
उन्होंने कहा कि इस सभा एवं आसंदी में विधान मंडल में प्रक्रिया या कार्य संचालन का विनियमन करने या व्यवस्था बनाए रखने की शक्तियां निहित है तथा यह न्यायालय की आधिकारिता के अधीन नहीं है। अध्यक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 212 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि राज्य के विधान मंडल की किसी कार्यवाही की विधि मान्यता को प्रक्रिया की किसी अभिकथन अनियमितता के आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा। साभार : आईबीएन





