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हाईकोर्ट ने पिंकसिटी प्रेस क्लब के फैसले को सही ठहराया

राजस्थान उच्च न्यायालय ने पिंकसिटी प्रेस क्लब जयपुर की पूर्व कार्यकारिणी के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें 136 लोगों की सदस्यता को समाप्त किया गया था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले पर भी रोक लगा दी, जिसके तहत न्यायालय की अवमानना कानून के तहत याचिका को स्वीकृत कर क्लब से दस्तावेज मांगे गए थे। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बेला एम.त्रिवेदी की एकल पीठ ने पिंकसिटी प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष एल.एल.शर्मा और अन्य पदाधिकारियों की ओर से दायर याचिका को मंजूर करते हुए कहा है कि क्लब के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों ने अदालत की कोई अवमानना नहीं की।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने पिंकसिटी प्रेस क्लब जयपुर की पूर्व कार्यकारिणी के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें 136 लोगों की सदस्यता को समाप्त किया गया था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले पर भी रोक लगा दी, जिसके तहत न्यायालय की अवमानना कानून के तहत याचिका को स्वीकृत कर क्लब से दस्तावेज मांगे गए थे। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बेला एम.त्रिवेदी की एकल पीठ ने पिंकसिटी प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष एल.एल.शर्मा और अन्य पदाधिकारियों की ओर से दायर याचिका को मंजूर करते हुए कहा है कि क्लब के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों ने अदालत की कोई अवमानना नहीं की।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा दी। पिंकसिटी प्रेस क्लब के तत्कालीन अध्यक्ष एल.एल.शर्मा और उनकी कार्यकारिणी ने मई 2011 में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए क्लब के ऐसे 136 सदस्यों की सदस्यता समाप्त की थी, जिनकी आजीविका एक मात्र पत्रकारिता नहीं है अथवा उनका पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं है। कार्यकारिणी के इस ऐतिहासिक फैसले को क्लब की साधारण सभा की बैठक में भी पारित किया गया था। क्लब की प्रबंध कार्यकारिणी के इस फैसले के खिलाफ अंजनी कुमार खटोड नाम के व्यक्ति ने अपर सिविल न्यायाधीश(कनिष्ठ खण्ड) एवं महानगर मजिस्ट्रेट क्रम संख्या एक के यहां न्यायालय की अवमानना कानून के तहत याचिका दायर की थी। इस पर मजिस्ट्रेट ने चार नवम्बर 2011 को अपने एक आदेश में अवमानना याचिका मंजूर कर क्लब से दस्तावेज तलब किए थे। दीवानी न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ क्लब के तत्कालीन अध्यक्ष एल.एल.शर्मा, महासचिव नीरज मेहरा, कार्यकारिणी सदस्य सत्य पारीक, मुकेश चौधरी, मांगीलाल पारीक और योगेश शर्मा ने राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि क्लब के तत्कालीन अध्यक्ष एल.एल.शर्मा और उनकी कार्यकारिणी का फैसला उचित था। याचिकाकर्त्ता क्लब ने न्यायालय की कोई अवमानना नहीं की। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत के चार नवम्बर 2011 के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि दीवानी न्यायालय को अवमानना कानून के तहत प्रतिवादी खटोड की याचिका स्वीकार करने का कोई अधिकारी नहीं था। यह अधिकार केवल हाईकोर्ट को है। गौरतलब है कि पिंकसिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष एल एल शर्मा के इस फैसले के समय राजस्थान के पत्रकार जगत में काफी हलचल हुई थी और क्लब के कई सदस्य लाल पीले हुए थे। ग्रामीण परिवेश से जुडे एल एल शर्मा पिंकसिटी प्रेस क्लब के चौथी बार अध्यक्ष बने थे।

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